सहरसा: प्रेम, हकीकत और मौत; प्रेमी के ‘लौंडा डांसर’ होने की बात बर्दाश्त नहीं कर पाई पार्वती, साड़ी का फंदा लगाकर दी जान

सहरसा | 23 फरवरी, 2026: सहरसा जिले के वनमा इतिहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत हरहरी गांव (वार्ड नंबर 17) में एक प्रेम कहानी का अंत बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला रहा। एक युवती, जिसने अपने जीवन के सुनहरे सपने एक युवक के साथ बुने थे, हकीकत सामने आने पर उसे बर्दाश्त नहीं कर सकी और लोक-लाज के डर से मौत को गले लगा लिया।

क्या थी वो ‘हकीकत’ जिसने ले ली जान?

​ग्रामीणों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्वती कुमारी (पिता—माहेश्वरी मंडल) का प्रेम संबंध गांव के ही पांडव कुमार (पिता—लालू मंडल) के साथ लंबे समय से चल रहा था।

  • अधूरा सच: बताया जाता है कि दोनों एक-दूसरे से प्यार तो करते थे, लेकिन पार्वती को पांडव के पेशे के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी।
  • खुलासा: शादी या रिश्ते के अगले पड़ाव पर पहुँचने से ठीक पहले पार्वती को पता चला कि पांडव ‘लौंडा नाच’ (पारंपरिक लोक नृत्य) का काम करता है।
  • मानसिक तनाव: इस सच्चाई ने पार्वती को बुरी तरह तोड़ दिया। समाज में इस पेशे को लेकर जुड़ी रूढ़ियों और ‘लोग क्या कहेंगे’ के डर ने उसे गहरे तनाव में धकेल दिया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि: संघर्षों के बीच पली-बढ़ी थी पार्वती

​पार्वती का परिवार बेहद साधारण और मेहनतकश है। घर की स्थिति कुछ इस प्रकार थी..

सदस्य

परिचय/पेशा

पिता (माहेश्वरी मंडल)

बाहर रहकर मजदूरी (बोरी ढोने का काम) करते हैं।

भाई (गणेश कुमार)

ग्रामीण स्तर पर भजन गायक।

पार्वती कुमारी

6 बहनों में सबसे छोटी (8वीं तक पढ़ाई)।

अन्य बहनें

सभी 5 बहनों की शादी हो चुकी है।

पुलिस की एंट्री: अंतिम संस्कार के बीच पहुँची खाकी

​घटना के समय पार्वती का भाई गणेश घर पर नहीं था। उसकी पत्नी संगीता ने जब पार्वती का शव फंदे से लटका देखा, तो चीख-पुकार मच गई।

  1. अंतिम विदाई की तैयारी: गांव और समाज के लोग जुटे और बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई।
  2. गुप्त सूचना: इसी बीच किसी ने पुलिस को खबर कर दी।
  3. शव बरामदगी: वनमा इतिहरी थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेज दिया।

द वॉयस ऑफ बिहार विश्लेषण

​यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस सोच पर भी सवाल उठाती है जहाँ किसी का ‘पेशा’ उसकी इंसानियत और प्यार से बड़ा हो जाता है। एक कलाकार (डांसर) होने की सच्चाई एक युवती के लिए मौत की वजह बन गई, जो सामाजिक दबाव और लोक-लाज की गहराई को दर्शाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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