भागलपुर की ‘योद्धा बेटी’: घर में रखी थी पिता की अर्थी, केंद्र पहुँचकर प्रिया ने दी मैट्रिक की परीक्षा

भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: हौसले और संकल्प की एक ऐसी मार्मिक कहानी भागलपुर के घोघा से सामने आई है, जिसने पूरे जिले को भावुक कर दिया है। जानीडीह गांव की छात्रा प्रिया कुमारी ने साबित कर दिया कि पिता के सपनों को पूरा करना ही एक संतान की उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती है। शनिवार को एक ओर घर में पिता का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई का इंतजार कर रहा था, तो दूसरी ओर प्रिया परीक्षा हॉल में अपने भविष्य की नींव रख रही थी।

विवरण

जानकारी

छात्रा

प्रिया कुमारी (मैट्रिक परीक्षार्थी)

स्थान

जानीडीह गांव, घोघा थाना क्षेत्र, भागलपुर

पिता

स्वर्गीय राजकिशोर महतो

विषम परिस्थिति

पिता के निधन के चंद घंटों बाद बोर्ड परीक्षा

कैंसर से हार गए जंग, पर बेटी को दे गए ‘जीत’ का मंत्र

​प्रिया के पिता राजकिशोर महतो पिछले 22 महीनों से ‘ओरल कैंसर’ (मुंह के कैंसर) जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी के कारण उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनकी जीभ काटनी पड़ी थी और वे बोल भी नहीं पा रहे थे।

  • अंतिम समय: शुक्रवार की आधी रात राजकिशोर महतो ने अंतिम सांस ली।
  • संकट: शनिवार सुबह प्रिया की मैट्रिक की परीक्षा थी। पिता के जाने के गम में डूबी प्रिया पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन पिता का सपना उसकी आंखों के सामने था।

आंसुओं के बीच दी जीवन की सबसे कठिन परीक्षा

​परिजनों और ग्रामीणों ने प्रिया को ढांढस बंधाया और उसे याद दिलाया कि उसके पिता उसे शिक्षित और सफल देखना चाहते थे। इसी संकल्प के साथ:

  1. परीक्षा केंद्र: प्रिया भारी मन और आंसुओं के साथ भागलपुर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंची।
  2. साहस: जिस समय घर पर अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी, प्रिया परीक्षा हॉल में अपना पेपर लिख रही थी।
  3. अंतिम विदाई: परीक्षा खत्म होते ही वह बिना एक पल गंवाए सीधे घर पहुंची और पिता की अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें मुखाग्नि की प्रक्रियाओं में भाग लिया।

जिले भर में हो रही है सराहना

​प्रिया के इस अटूट संकल्प की चर्चा अब पूरे भागलपुर में है। लोगों का कहना है कि प्रिया ने यह दिखा दिया कि शिक्षा और कर्तव्य के प्रति समर्पण क्या होता है। सोशल मीडिया पर भी लोग उसे ‘योद्धा बेटी’ कहकर संबोधित कर रहे हैं।

द वॉयस ऑफ बिहार का संदेश: प्रिया कुमारी का यह साहस उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबरा जाते हैं। ऐसी बेटियां समाज का गौरव हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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