उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) | 23 फरवरी, 2026: बिहार के मधेपुरा जिले में लोक-लाज और झूठी शान की खातिर एक पिता और चाचा ने रिश्तों का गला घोंट दिया। 10 दिनों पहले जिसे प्रसव के दौरान हुई सामान्य मौत समझा जा रहा था, वह दरअसल एक सोची-समझी क्रूर हत्या निकली। पुलिस ने इस सनसनीखेज साजिश का पर्दाफाश करते हुए मृतका के पिता, चाचा और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।
अस्पताल से घर तक: मौत की पटकथा
घटनाक्रम की शुरुआत 13 फरवरी की रात हुई, जब 20 वर्षीय युवती को प्रसव पीड़ा के बाद उदाकिशुनगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- अस्पताल में जन्म: युवती ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
- साजिश का आगाज: प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उसे रेफर कर दिया।
- एंबुलेंस से इनकार: पुलिस के अनुसार, परिजनों ने सरकारी एंबुलेंस लेने से इनकार कर दिया और निजी वाहन से ले जाने के बहाने उसे घर ले गए, जहाँ उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
साक्ष्य मिटाने की नाकाम कोशिश
बेटी की हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए भागलपुर के महादेवपुर गंगा घाट ले जाने की योजना बनाई।
- शव बरामदगी: स्थानीय लोगों की सतर्कता और सूचना पर पुलिस ने नवगछिया के पास से शव को बरामद कर लिया।
- गुमराह करने की साजिश: शुरुआत में पिता अम्बेद भारती ने खुद को निर्दोष बताते हुए अपनी बेटी के प्रेमी रिशू कुमार पर यौन शोषण और हत्या का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी, ताकि पुलिस का ध्यान भटक जाए।
वैज्ञानिक जांच: प्रेमी के खुलासे ने हिला दी पुलिस
उदाकिशुनगंज एसडीपीओ अविनाश कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जब तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को खंगाला, तो कहानी पूरी तरह पलट गई।
- प्रेमी का इकबालिया बयान: 20 फरवरी को गिरफ्तार हुए प्रेमी रिशू राज ने बताया कि उसने ही नवजात बच्ची को एक थैले में भरकर एनएच-106 स्थित पुल के नीचे फेंक दिया था।
- पिता और चाचा का कबूलनामा: रिशू के बयान के बाद पुलिस ने जब पिता अम्बेद भारती और चाचा तपेश यादव से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने इस मामले में तीनों मुख्य आरोपियों को जेल भेज दिया है।
- जब्ती: हत्या में प्रयुक्त वाहन और आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।
- चार्ज: आरोपियों पर हत्या, साक्ष्य छिपाने और नवजात को लावारिस छोड़ने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
द वॉयस ऑफ बिहार का संदेश
”ऑनर किलिंग” समाज के माथे पर एक काला धब्बा है। एक मासूम नवजात को पुल के नीचे फेंकना और अपनी ही बेटी की हत्या करना उस सामाजिक कट्टरता को दर्शाता है, जहाँ ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर मानवीय संवेदनाओं से बड़ा हो जाता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


