बिहार विधानसभा में मंदिरों की सुरक्षा और घेराबंदी पर बहस, BJP विधायकों ने सरकार से उठाए अहम सवाल

पटना: बिहार विधानसभा में आज फिर मंदिरों की घेराबंदी और सुरक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक तार किशोर प्रसाद ने सरकार से सवाल किया कि जिन मंदिरों का अब तक पंजीकरण नहीं हुआ है, क्या उनकी चारदीवारी का निर्माण सरकार कराएगी। उन्होंने कहा कि कई जगह मंदिर खुले पड़े हैं और अतिक्रमण का खतरा बना रहता है, इसलिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए भाजपा विधायक सुनील कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 10 हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई है, चाहे वे पूरी तरह चिन्हित हों या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कब्रिस्तानों के लिए इतनी सक्रियता दिखाई गई, तो मंदिरों के मामले में पंजीकरण की शर्त क्यों रखी जा रही है। उनका कहना था कि न्यास बोर्ड में पंजीकृत नहीं होने के आधार पर मंदिरों की घेराबंदी रोकना उचित नहीं है।

विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सरकारी या गैर-मजरुआ जमीन को कब्रिस्तान घोषित कर घेराबंदी की जा रही है। बिहार शरीफ का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां कथित रूप से सरकारी जमीन को घेरकर कब्रिस्तान बनाया गया। ऐसे मामलों से बहुसंख्यक समाज में असंतोष बढ़ रहा है।

विपक्षी विधायकों का तर्क है कि सरकार सभी धार्मिक स्थलों के प्रति समान नीति अपनाए। भाजपा के भाई वीरेंद्र ने कहा कि मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है जितना अन्य धार्मिक स्थलों का, और इसमें किसी समाज विशेष का भेद नहीं होना चाहिए।

इस पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने जवाब दिया कि राज्य में धार्मिक न्यास परिषद में पंजीकृत मंदिरों की संख्या काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि मंदिर और कब्रिस्तान की घेराबंदी को लेकर 2016 के बाद कोई बैठक नहीं हुई है, जिसे जल्द बुलाया जाएगा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि संवेदनशील स्थलों की समस्याओं की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि घेराबंदी की प्रक्रिया नियमों और पंजीकरण के आधार पर होती है, ताकि कानूनी विवाद से बचा जा सके। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को समानता और न्याय से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल, विधानसभा में उठाए गए सवाल राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


 

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