भागलपुर | 22 फरवरी, 2026: भागलपुर के लाजपत पार्क स्थित आईएमए (IMA) भवन में रविवार को ‘नन्हे दिलों’ की मुस्कान बचाने के लिए एक बड़ी पहल की गई। जीवन जागृति सोसाइटी और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), भागलपुर के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस निःशुल्क शिविर में सैकड़ों बच्चों के हृदय की बारीकी से जांच की गई।
मेदांता पटना के विशेषज्ञों ने की ‘इको’ जांच
शिविर में मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना की शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ टीम ने अपनी सेवाएं दीं। आधुनिक मशीनों के जरिए बच्चों की इको (ECHO) और अन्य आवश्यक जांचें मौके पर ही की गईं। विशेषज्ञों ने उन बच्चों की पहचान की जिन्हें तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप या सर्जरी की आवश्यकता है।
लक्षणों के प्रति अभिभावकों को दी गई जानकारी
शिविर के दौरान डॉक्टरों ने अभिभावकों को उन संकेतों के बारे में विस्तार से बताया जिन्हें अक्सर माता-पिता सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं:
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लक्षण |
क्यों है चिंता का विषय? |
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सांस लेने में तकलीफ |
हृदय में छेद या वॉल्व संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। |
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वजन न बढ़ना |
पोषक तत्वों के बावजूद विकास रुकना हृदय रोग का लक्षण है। |
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जल्दी थक जाना |
खेलते समय जल्दी हाफ जाना कमजोर हृदय का संकेत है। |
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बार-बार सर्दी-खांसी |
फेफड़ों और हृदय के बीच असंतुलन की वजह से हो सकता है। |
पुष्टि होने पर मेदांता में होगा निःशुल्क ऑपरेशन
जीवन जागृति सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि इस शिविर में जिन बच्चों में हृदय रोग की पुष्टि हुई है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे जरूरतमंद बच्चों का आगे का इलाज और यदि आवश्यक हुआ तो हृदय की सर्जरी, मेदांता अस्पताल पटना में पूरी तरह निःशुल्क कराई जाएगी।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
शिविर के सफल संचालन में चिकित्सा जगत की कई हस्तियों ने योगदान दिया:
- मुख्य आयोजक: डॉ. अजय कुमार सिंह (अध्यक्ष, IAP भागलपुर) और सोमेश यादव (सचिव, जीवन जागृति सोसाइटी)।
- विशेषज्ञ टीम: डॉ. अनिल यादव, डॉ. आर. के. मिश्रा और डॉ. पी. के. यादव।
- सहयोग: श्रीमती आभा पाठक एवं अन्य स्वयंसेवक।
भविष्य की योजना
संस्था के सचिव सोमेश यादव ने कहा कि भागलपुर और आसपास के इलाकों में बच्चों के बीच हृदय रोग एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है। इसे देखते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के विशिष्ट जांच शिविरों का आयोजन जारी रहेगा ताकि किसी भी बच्चे का इलाज पैसे के अभाव में न रुके।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


