भागलपुर की ‘आवाज’ खामोश: आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक डॉ. विजय कुमार मिश्र ‘विरजू भाई’ का निधन, शोक में डूबा साहित्य और कला जगत

भागलपुर | 22 फरवरी, 2026: रेशम नगरी भागलपुर के सांस्कृतिक और बौद्धिक आकाश का एक चमकता सितारा आज हमेशा के लिए अस्त हो गया। आकाशवाणी भागलपुर के सुप्रसिद्ध और वरीय उद्घोषक डॉ. विजय कुमार मिश्र, जिन्हें दुनिया ‘विरजू भाई’ के नाम से जानती थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।

तिलकामांझी स्थित आवास पर उमड़ा जनसैलाब

​जैसे ही डॉ. मिश्र के निधन की सूचना मिली, तिलकामांझी स्थित उनके कटहलबाड़ी आवास पर शुभचिंतकों और प्रशंसकों का तांता लग गया। ‘विरजू भाई’ को अंतिम विदाई देने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे:

  • आकाशवाणी परिवार: उनके सहकर्मी और वरिष्ठ अधिकारी, जो उनकी आवाज और मिलनसार व्यक्तित्व के कायल थे।
  • बौद्धिक वर्ग: शहर के नामचीन साहित्यकार, बुद्धिजीवी और रंगकर्मी।
  • सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र: स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत

​डॉ. विजय कुमार मिश्र का व्यक्तित्व केवल रेडियो तक सीमित नहीं था। उनकी जड़ें अत्यंत गहरी और गौरवशाली थीं:

  • कुलीन वंशज: वे काशी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य जी महाराज के पूर्वज वंश से संबंध रखते थे।
  • विद्वता: साहित्य और भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ के कारण उन्हें ‘डॉक्टर’ की उपाधि प्राप्त थी, और उनकी शैली ने आकाशवाणी भागलपुर को एक विशिष्ट पहचान दी थी।

आकाशवाणी परिवार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

​आकाशवाणी भागलपुर केंद्र में आज शोक सभा का आयोजन किया गया, जहाँ सहकर्मियों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। केंद्र के कर्मियों ने कहा कि ‘विरजू भाई’ केवल एक उद्घोषक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक थे। उनकी सहज शैली और संवाद करने की कला ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था।

सांस्कृतिक जगत के लिए बड़ी क्षति

​स्थानीय साहित्यकारों का कहना है कि डॉ. मिश्र के निधन से भागलपुर ने एक ऐसा साधक खो दिया है जो शब्दों की गरिमा को बखूबी समझता था। उनके जाने से जो शून्यता पैदा हुई है, उसे भरना आसान नहीं होगा।

द वॉयस ऑफ बिहार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि: ‘विरजू भाई’ की आवाज भले ही अब रेडियो तरंगों पर सुनाई न दे, लेकिन उनकी स्मृतियां और उनके द्वारा दी गई साहित्यिक विरासत भागलपुर के जनमानस में सदैव जीवंत रहेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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