भागलपुर नगर संवाददाता | 22 फरवरी, 2026: शहर की आंतरिक व्यवस्था, राजस्व और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अब पूरी तरह कमर कस ली है। निगम की अतिक्रमण शाखा और विशेष टीमों ने शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक व्यापक जांच अभियान छेड़ दिया है। इस अभियान के पहले चरण में 300 संस्थानों को नोटिस जारी कर उनके दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
सुनवाई में संचालकों की लापरवाही: 75 में से मात्र 43 पहुंचे
नगर निगम कार्यालय में प्रतिदिन 75 संचालकों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है, ताकि उनके प्रतिष्ठानों की वैधता और सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके। हालांकि, निगम प्रशासन की इस कवायद में संचालकों की ओर से भारी लापरवाही देखने को मिल रही है।
- शनिवार की रिपोर्ट: शनिवार को बुलाए गए कुल 75 संचालकों में से केवल 43 ही सुनवाई के लिए उपस्थित हुए।
- अनुपस्थिति का औसत: नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, अब तक की सुनवाई में औसतन 10 से 15 प्रतिशत संचालक नदारद रह रहे हैं।
- तैयारी की कमी: नगर प्रबंधक असगर अली ने बताया कि जो संचालक पहुंच भी रहे हैं, उनमें से कई बिना पूरी तैयारी और अधूरे दस्तावेजों के साथ आ रहे हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया में बाधा आ रही है।
इन 5 प्रमुख मानकों पर हो रही है प्रतिष्ठानों की ‘अग्निपरीक्षा’
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। जांच टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित पांच बिंदुओं पर अपनी नजरें टिकाए हुए है:
- वैधता और दस्तावेज: क्या प्रतिष्ठान के पास स्वीकृत नक्शा है? रेंट एग्रीमेंट और ट्रेड लाइसेंस की वर्तमान स्थिति क्या है?
- राजस्व अद्यतन: होल्डिंग टैक्स का भुगतान समय पर किया गया है या नहीं। बकाया टैक्स वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- स्वच्छता प्रबंधन: दुकान या संस्थान के बाहर डस्टबिन की उपलब्धता अनिवार्य है। साथ ही गीले और सूखे कचरे के निस्तारण की क्या व्यवस्था है, इसकी जांच की जा रही है।
- सुरक्षा मानक: सबसे महत्वपूर्ण ‘फायर फाइटिंग’ मानकों का पालन है। भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के उपकरण और एनओसी (NOC) की जांच की जा रही है।
- मेडिकल वेस्ट: क्लीनिक और पैथोलॉजी जैसे संस्थानों के लिए यह अनिवार्य है कि उनका किसी अधिकृत निस्तारण एजेंसी के साथ एग्रीमेंट हो।
नगर निगम की चेतावनी: लापरवाही पड़ेगी महंगी
नगर प्रबंधक असगर अली ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जो संचालक नोटिस के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हो रहे हैं या जानबूझकर दस्तावेजों को छुपा रहे हैं, उनके खिलाफ निगम अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माने से लेकर प्रतिष्ठान को सील करने तक की नौबत आ सकती है।
निगम का उद्देश्य शहर में अवैध रूप से चल रहे व्यापारिक गतिविधियों पर लगाम लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यावसायिक परिसर सुरक्षा और स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरे।


