पटना | 21 फरवरी, 2026: बिहार को ध्वनि प्रदूषण, सड़क सुरक्षा खतरों और अवैध मॉडिफाइड वाहनों से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। परिवहन विभाग ने राज्य भर में 15 दिनों के भीतर ‘डीजे मुक्त बिहार’ अभियान को सफल बनाने का लक्ष्य रखा है। विभाग के सचिव श्री राज कुमार ने इस संबंध में सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारियों (DTO) और मोटर वाहन निरीक्षकों (MVI) को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
अवैध मॉडिफाइड वाहनों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
परिवहन विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के वाहनों की संरचना में बदलाव कर लगाए गए डीजे सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके लिए विभाग ने तीन स्तरीय कार्रवाई शुरू की है:
- सघन जांच: सड़कों पर चल रहे संदिग्ध और मॉडिफाइड वाहनों की तत्काल जांच की जाएगी।
- चालान और जब्ती: नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का न केवल भारी चालान काटा जाएगा, बल्कि उन्हें जब्त भी किया जाएगा।
- पंजीकरण रद्द करना: गंभीर मामलों में संबंधित वाहनों का रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
कानूनी प्रावधान और दंड की रूपरेखा
मोटर वाहन अधिनियम के तहत इन अवैध संशोधनों के खिलाफ कड़ी धाराओं का प्रावधान किया गया है।
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उल्लंघन का प्रकार |
लागू धारा (Motor Vehicle Act) |
संभावित कार्रवाई |
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बिना अनुमति संरचना परिवर्तन |
धारा 52 |
वाहन की जब्ती और जुर्माना |
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अवैध पंजीकरण उल्लंघन |
धारा 55 (5) एवं 182 (ए) |
पंजीकरण रद्द करना और दंड |
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ध्वनि/पर्यावरण प्रदूषण |
प्रदूषण नियंत्रण मानक |
2,000 रुपये का तत्काल चालान |
अभियान का मुख्य उद्देश्य: सुरक्षा और शांति
परिवहन विभाग के अनुसार, यह मुहिम केवल ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए नहीं, बल्कि निम्नलिखित कारणों से भी आवश्यक है:
- सड़क सुरक्षा: मॉडिफाइड डीजे वाहन अक्सर अन्य चालकों का ध्यान भटकाते हैं और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
- सार्वजनिक व्यवस्था: शादी-ब्याह और बारातों के दौरान डीजे वाहनों के कारण होने वाली अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करना।
- कमर्शियल वाहनों का दुरुपयोग: जो लोग अपने वाहनों को माल ढोने (कमर्शियल) के लिए पंजीकृत कराते हैं और बाद में उनमें डीजे सिस्टम लगवा लेते हैं, उन पर विभाग की पैनी नजर है।
सचिव की अंतिम चेतावनी
विभाग ने चेतावनी दी है कि पटना सहित कई जिलों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे वाहन पहले ही पकड़े जा चुके हैं। 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर यदि संचालकों ने स्वयं ऐसे मॉडिफिकेशन नहीं हटाए, तो उन पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।


