पटना | 21 फरवरी, 2026: पटना विश्वविद्यालय (PU) में चुनावी सरगर्मी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 फरवरी को प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह कड़ा निर्णय परिसर में लगातार हो रही अनुशासनहीनता, शिक्षकों के साथ मारपीट और चुनाव आचार संहिता के खुले उल्लंघन के बाद लिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार को एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस फैसले की जानकारी दी, जिसके बाद छात्र संगठनों में भारी खलबली मच गई है।
चुनाव टलने के 3 मुख्य कारण
1. साइंस कॉलेज में शिक्षक से मारपीट और अभद्रता:
शनिवार को पटना साइंस कॉलेज परिसर में चुनाव प्रचार के दौरान हालात तब बेकाबू हो गए, जब एक क्लास के दौरान कुछ छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि छात्रों ने एक शिक्षक और विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। इस घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
2. पटना वीमेंस कॉलेज में बिना अनुमति प्रवेश:
इससे पूर्व, छात्रों के एक गुट ने बिना किसी अनुमति के पटना वीमेंस कॉलेज परिसर में प्रवेश कर लिया और वहां जमकर नारेबाजी की। इस अमर्यादित घटना को प्रशासन ने चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन माना।
3. आचार संहिता और नियमों की धज्जियां:
प्रशासन को चुनाव प्रचार को लेकर कई गंभीर शिकायतें मिल रही थीं।
- उम्मीदवारों ने निर्धारित समय से पहले ही प्रचार अभियान शुरू कर दिया था।
- नियम विरुद्ध जाकर परिसरों में महंगे छपे हुए बैनर और पोस्टर लगाए गए।
- चुनाव प्रचार में शक्ति प्रदर्शन के लिए महंगे चार पहिया वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश: ‘अनुशासन से समझौता नहीं’
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और परिसर में शांति बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
”शैक्षणिक वातावरण और छात्रों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन अमर्यादित घटनाओं और अनुशासनहीनता को देखते हुए फिलहाल चुनाव स्थगित किया जा रहा है।”
प्रशासन ने सभी छात्र संगठनों से संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि हालात पूरी तरह सामान्य होने और स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद ही चुनाव की नई तारीख घोषित की जाएगी।
छात्र राजनीति में हड़कंप
चुनाव की तारीख (28 फरवरी) नजदीक होने के कारण कई उम्मीदवार महीनों से पसीना बहा रहे थे और प्रचार अपने चरम पर था। चुनाव स्थगित होने के इस अचानक आए फैसले से छात्र नेताओं की पूरी रणनीति धरी की धरी रह गई है। अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


