लखीसराय | 21 फरवरी, 2026: बिहार सरकार द्वारा राज्य भर में डीजे (DJ) बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा ने लखीसराय जिले के सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। सरकार के इस कड़े फैसले के खिलाफ शनिवार को लखीसराय डीजे साउंड यूनियन ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी मिथलेश मिश्र को अपना मांग पत्र सौंपा।
“अपराधी नहीं, हम छोटे स्वरोजगारी हैं”
प्रदर्शन कर रहे डीजे संचालकों का दर्द छलकता दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि यह व्यवसाय केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का एकमात्र आधार है।
- कर्ज का जाल: अधिकांश संचालकों ने बैंकों और महाजनों से लाखों रुपये का कर्ज लेकर डीजे मशीनें, साउंड बॉक्स और गाड़ियां खरीदी हैं। अचानक लगे इस प्रतिबंध से वे कर्ज चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हो जाएंगे।
- शिक्षा और चूल्हा: जिले में सैकड़ों युवा इस काम से जुड़े हैं। बच्चों की स्कूल की फीस से लेकर घर के बुजुर्गों की दवाई तक, सब कुछ इसी ‘साउंड’ की कमाई पर टिका है।
- बेरोजगारी का खौफ: संचालकों का कहना है कि सरकार ने एक झटके में उन्हें बेरोजगार कर दिया है, जिससे उनके सामने अब आत्मघाती स्थिति पैदा हो गई है।
डीएम को सौंपा आवेदन: ‘इंसाफ’ की मांग
यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम मिथलेश मिश्र से मिलकर अपनी समस्याओं का पुलिंदा उनके सामने रखा। संचालकों ने अपनी मांगों में स्पष्ट किया कि:
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- पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियमों को सख्त किया जाए (जैसे डेसीबल की सीमा तय करना)।
- जिन संचालकों ने लोन लिया है, उन्हें विशेष राहत या वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराया जाए।
- विवाह और उत्सवों के सीजन को देखते हुए इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार हो।
”साहब, हम किसी का बुरा नहीं कर रहे। अपनी मेहनत से दो जून की रोटी कमा रहे थे। अगर डीजे बंद हुआ तो हम और हमारे बच्चे सड़क पर आ जाएंगे। सरकार को हमारे पेट की आग भी देखनी चाहिए।”
— डीजे साउंड यूनियन के एक सदस्य
प्रशासनिक रुख
लखीसराय के डीएम ने संचालकों के आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी जायज मांगों और पीड़ा को राज्य सरकार तक पहुँचाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ध्वनि प्रदूषण और सामाजिक शांति को लेकर सरकार के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है।
द वॉयस ऑफ बिहार की राय
नियम जरूरी हैं, लेकिन क्या हजारों परिवारों को एक साथ बेरोजगार कर देना सही समाधान है? सरकार को चाहिए कि वह ‘प्रतिबंध’ के स्थान पर ‘नियमन’ (Regulation) का रास्ता अपनाए, ताकि पर्यावरण भी बचे और लोगों का रोजगार भी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


