गया में नक्सलियों के ‘डेथ ट्रैप’ का पर्दाफाश: गुफा में छिपा था विस्फोटकों का जखीरा, CRPF ने टाला बड़ा हमला

गया | 21 फरवरी, 2026: बिहार के गया जिले में नक्सलियों की एक बड़ी और खौफनाक साजिश को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की F/47 बटालियन ने एक खुफिया जानकारी के आधार पर सघन सर्च ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों द्वारा छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं।

​यह बरामदगी गया के नक्सल प्रभावित डुमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत छक्करबंधा जंगल की एक प्राकृतिक गुफा से हुई है।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसा सर्च ऑपरेशन

​सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि गोबरदाहा क्षेत्र के घने जंगलों में नक्सलियों ने किसी बड़े हमले को अंजाम देने के लिए गोला-बारूद जमा कर रखा है।

  • ऑपरेशन का समय: मंगलवार दोपहर करीब 02:15 बजे।
  • लोकेशन: पंचरुखिया कैंप से लगभग 3.5 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम के दुर्गम जंगल।
  • टीम: सीआरपीएफ की एफ/47 बटालियन के जवानों ने गुफा की घेराबंदी कर इस जखीरे को बरामद किया।

बरामदगी की लिस्ट: तबाही का पूरा सामान

​सीआरपीएफ कमांडेंट अवधेश कुमार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बरामद सामानों की मात्रा दर्शाती है कि नक्सली किसी बड़े सुरक्षा कैंप या वीआईपी मूवमेंट को निशाना बनाने की तैयारी में थे।

बरामद सामग्री

मात्रा/विवरण

प्रेशर आईईडी (IED)

3 किलोग्राम (स्टील केन में पैक)

कमर्शियल डेटोनेटर

29 पीस

कॉर्डटेक्स वायर

25 मीटर (विस्फोटक जोड़ने के लिए)

एके-47 कारतूस

7 जिंदा राउंड, 18 खोखे

7.62 मिमी कारतूस

33 जिंदा राउंड, 13 खोखे

अन्य कारतूस

9

नक्सलियों के मंसूबों पर फिरा पानी

​सुरक्षा बलों का मानना है कि बरामद आईईडी और डेटोनेटर का उपयोग ‘लैंडमाइन’ बिछाने में किया जाना था।

​”बरामद सामग्री की मात्रा से साफ है कि माओवादी सुरक्षा बलों या किसी बड़े सिविल लक्ष्य पर हमले की फिराक में थे। समय रहते सूचना मिलने और त्वरित कार्रवाई के कारण यह घातक मंशा विफल हो गई है।”

अवधेश कुमार, कमांडेंट, CRPF

इलाके में ‘हाई अलर्ट’

​इस बड़ी कामयाबी के बाद पूरे छक्करबंधा और आसपास के जंगलों में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है। पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह जखीरा किस नक्सली दस्ते का था। आसपास के गांवों में भी संदिग्धों की पहचान के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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