भागलपुर | 21 फरवरी, 2026: देश की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट (India AI Impact Summit 2026) के दौरान हुए राजनीतिक हंगामे की गूंज अब भागलपुर तक पहुँच गई है। समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन को लेकर भागलपुर के अधिवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। वकीलों का स्पष्ट कहना है कि वैश्विक मंच पर इस तरह की हरकतें भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को बट्टा लगाती हैं।
“अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध देशहित में नहीं”
भागलपुर कोर्ट में वकालत कर रहे वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने एक सुर में इस घटना को “घोर निंदनीय” बताया। वकीलों का तर्क है कि जब दुनिया भर के टेक दिग्गज, निवेशक और प्रतिनिधि भारत की तकनीकी शक्ति को देखने आए हों, तब घरेलू राजनीति का प्रदर्शन करना शर्मनाक है।
अधिवक्ताओं की मुख्य आपत्तियाँ:
- देश की छवि का सवाल: अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में राजनीतिक गतिरोध से विदेशी निवेशकों के बीच गलत संदेश जाता है।
- तकनीकी प्रगति में बाधा: एआई (AI) और आईटी क्षेत्र भारत के भविष्य की नींव हैं। इस पर आयोजित वैश्विक चर्चा में व्यवधान डालना विकास विरोधी कदम है।
- मर्यादा का उल्लंघन: “राष्ट्र सर्वोपरि” के सिद्धांत को भूलकर केवल राजनीतिक हित साधने के लिए अंतरराष्ट्रीय वेन्यू का चुनाव करना गलत है।
क्या था मामला?
प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, जब भारत मंडपम के भीतर एआई समिट की कार्यवाही चल रही थी और विदेशी डेलीगेट्स एआई के भविष्य पर चर्चा कर रहे थे, तभी कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ता वेन्यू के पास पहुँच गए। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम के दौरान वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी रही।
“राजनीति के लिए अन्य मंचों का करें उपयोग”
भागलपुर के वकीलों ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन उसका समय और स्थान सही होना चाहिए।
”आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आयोजनों का उद्देश्य वैश्विक साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा देना है। ऐसे समय में जब भारत डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रहा है, इस तरह के हंगामे से दुनिया भर में हमारे लोकतंत्र और परिपक्वता पर सवाल उठते हैं। पहले राष्ट्र है, उसके बाद राजनीति।”
— भागलपुर के अधिवक्ताओं का साझा बयान
चर्चा का केंद्र बना ‘AI समिट’
समिट में जहाँ बिहार पवेलियन के जरिए राज्य में निवेश लाने की कोशिशें हो रही हैं (जैसा कि हालिया खबरों में देखा गया), वहीं इस तरह के विवाद ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। भागलपुर के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि तकनीकी विकास के मुद्दों पर सभी दलों को एकजुट होकर देश का मान बढ़ाना चाहिए।


