पटना | 21 फरवरी, 2026: बिहार में सियासत और अपराध की खबरों के बीच अब ‘डाटा और फैक्ट्स’ की जंग छिड़ गई है। मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा सोशल मीडिया (X) पर राज्य की विधि व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों पर बिहार पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस मुख्यालय ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर RJD के आरोपों को न केवल ‘बेबुनियाद’ बताया, बल्कि ट्वीट में जिक्र किए गए हर एक मामले में हुई पुलिसिया कार्रवाई का कच्चा चिट्ठा भी खोल दिया है।
“आरोप लगाने से पहले फैक्ट्स देख ले विपक्ष”
बिहार पुलिस ने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा जिन घटनाओं को आधार बनाकर सरकार को घेरा गया था, उन सभी मामलों में पुलिस पहले ही त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पुलिस के मुताबिक, अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम हो रहा है।
वारदात और पुलिसिया एक्शन: एक नजर में
विपक्ष के दावों की हवा निकालते हुए पुलिस ने निम्नलिखित मामलों में की गई गिरफ्तारियों का ब्योरा साझा किया है:
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जिला/स्थान |
मामला |
पुलिस की कार्रवाई |
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पटना (4 वर्षीय बच्ची) |
दुष्कर्म |
आरोपित गुड्डू कुमार उर्फ मनीष कुमार गिरफ्तार। |
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दरभंगा |
नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या |
मुख्य आरोपित विकास महतो गिरफ्तार। |
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भोजपुर |
डांसर से सामूहिक दुष्कर्म |
तीन आरोपित (जितेंद्र, अशोक और लक्ष्मण) गिरफ्तार। |
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शेखपुरा |
स्कूल जाती बच्ची से दुष्कर्म |
मो. इंजमामुल हक गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। |
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नवादा |
महिला की हत्या व दुष्कर्म |
विनीत यादव, रामस्वरूप राजवंशी गिरफ्तार; एक नाबालिग बाल सुधार गृह भेजा गया। |
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बेगूसराय |
दुष्कर्म का प्रयास |
चार आरोपित (मो. जमानत, आफताब, मिस्टर और इम्तियाज) जेल में। |
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सहरसा |
1.5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म |
आरोपित राज कुमार शर्मा गिरफ्तार। |
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मुंगेर (तारापुर) |
रिश्तेदार से दुष्कर्म |
आरोपित सौरभ कुमार गिरफ्तार। |
पटना सिटी लॉज मामला: उलझी गुत्थी को सुलझाया
पटना सिटी में लॉज मैनेजर से जुड़े मामले पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह क्रॉस-एफआईआर का मामला था। 7 फरवरी को किरायेदार मुस्ताक आलम ने मैनेजर नुसरत जहां समेत तीन पर केस किया था, जिसके बाद 8 फरवरी को नुसरत जहां ने मुस्ताक के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज कराया। पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर कार्रवाई कर रही है।
पुराने मामलों को भी बनाया गया मुद्दा
पुलिस ने चुटकी लेते हुए कहा कि भागलपुर में दुष्कर्म और हत्या का जिस मामले का जिक्र किया गया है, वह काफी पुराना है और उसमें भी कार्रवाई हो चुकी है। इसी प्रकार, डोरीगंज और अन्य मामलों में भी नाबालिग आरोपितों को नियमानुसार बाल सुधार गृह भेजा जा चुका है।
द वॉयस ऑफ बिहार की टिप्पणी: लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना है, लेकिन उन सवालों के पीछे ‘सत्य’ का होना भी जरूरी है। बिहार पुलिस की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया की ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ अब डेटा के आधार पर तैयार की जा रही है।


