पटना | 20 फरवरी: बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजधानी पटना के बापू टावर में शुक्रवार को ‘जीविका’ द्वारा लैंगिक संवेदनशीलता, पॉश (POSH) अधिनियम-2013 एवं शी-बॉक्स (SHe-Box) पोर्टल के संचालन पर एकदिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में जीविका की आंतरिक समिति (Internal Committee) के सदस्यों को कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक चुनौतियों के प्रति जागरूक किया गया।
महिला सशक्तीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: पंकज कुमार
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार ने कहा कि बिहार सरकार महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर अत्यंत गंभीर है। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ को एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल बताते हुए कहा:
”महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से मजबूत करना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसा वातावरण देना भी जरूरी है जहाँ वे बिना किसी डर या भेदभाव के काम कर सकें। जब समाज के हर वर्ग में न्याय और समानता को व्यवहार में लाया जाता है, तभी लोकतंत्र वास्तविक रूप से सफल होता है।”
उन्होंने आजादी से पहले और बाद के आंदोलनों का जिक्र करते हुए जोर दिया कि पॉश अधिनियम ने कार्यस्थलों पर संवेदनशीलता बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
कार्यस्थल पर ‘Do’s and Don’ts’ का पालन अनिवार्य: हिमांशु शर्मा
जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) श्री हिमांशु शर्मा ने अपने संबोधन में व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि:
- महिलाएँ कार्यस्थल पर विभिन्न स्तरों पर चुनौतियों का सामना करती हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
- प्रत्येक कर्मचारी के लिए स्पष्ट “Do’s and Don’ts” (क्या करें और क्या न करें) की सूची होनी चाहिए।
- सुरक्षित कार्य संस्कृति को संस्थान के सबसे निचले स्तर तक पहुँचाना हर पदाधिकारी की जिम्मेदारी है।
संस्थागत प्रगति के लिए सुरक्षित वातावरण जरूरी: अभिलाषा कुमारी शर्मा
जीविका की अपर कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता केवल उसकी योजनाओं से नहीं, बल्कि वहाँ के कार्य वातावरण से तय होती है। उन्होंने कहा कि POSH अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक समान अवसर प्रदान करने वाला सुरक्षा कवच है।
तकनीकी सत्र: बारीकियाँ और शिकायत निवारण
कार्यशाला के दौरान तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने कानूनी पेचिदगियों पर चर्चा की:
- जेंडर स्पेशलिस्ट गुंजन बिहारी और नोडल ऑफिसर अंकिता कश्यप ने व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए POSH अधिनियम के प्रावधानों को समझाया।
- शी-बॉक्स (SHe-Box) पोर्टल के संचालन और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
- आंतरिक शिकायत समिति की भूमिका और समयबद्ध निवारण की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
इस गरिमामयी कार्यक्रम में जीविका के निदेशक राम निरंजन सिंह, निदेशक (उद्यम) विनय कुमार राय, विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी, परियोजना प्रबंधक और बड़ी संख्या में आंतरिक समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में एक सुरक्षित, समान और गरिमापूर्ण कार्यस्थल बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


