द वॉयस ऑफ बिहार | पटना (19 फरवरी 2026)
बिहार सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग अब केवल राहत पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ वर्ष 2030 तक आपदा जनित मौतों में भारी कमी लाने का महाअभियान शुरू किया है।
राहत राशि में ₹1,000 की बढ़ोत्तरी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए विभाग ने अपना खजाना खोल दिया है:
- कुल भुगतान: 9 लाख 71 हजार 678 परिवारों को कुल 680 करोड़ 17 लाख रुपये की आनुग्राहिक राशि का भुगतान किया गया है।
- प्रति परिवार लाभ: विभाग के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने बताया कि पहले यह राशि ₹6,000 थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹7,000 प्रति परिवार कर दिया गया है।
सुरक्षित तैराकी और मिशन 2030
नदियों और गड्ढों में डूबकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए विभाग ने एक ‘डेडलाइन’ तय की है:
- लक्ष्य: वर्ष 2025-30 के बीच डूबकर मरने वालों की संख्या में 50 फीसदी की कमी लाना।
- प्रशिक्षण: इसके लिए 6 से 18 वर्ष के बच्चों और किशोरों को सुरक्षित तैराकी का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अगलगी और कृषि नुकसान पर मुआवजा
अगलगी की घटनाओं में भी विभाग तत्परता से राहत पहुँचा रहा है:
- आवास और पशु हानि: क्षतिग्रस्त मकानों और पशु-पक्षियों के नुकसान की भरपाई के लिए 44.84 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
- कृषि इनपुट: किसानों के लिए 12.70 करोड़ रुपये कृषि इनपुट अनुदान और 9.20 करोड़ रुपये अनुग्रह अनुदान के रूप में आवंटित हैं।
हर जिले में बनेंगे ‘प्रशिक्षण केंद्र’
त्वरित बचाव कार्यों के लिए विभाग बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है:
ERF-TC का निर्माण: राज्य के सभी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं।
- प्रगति: चिन्हित 18 जिलों में से 17 में काम पूरा हो चुका है, जबकि पटना में निर्माण कार्य प्रगति पर है। शेष 20 जिलों में भी जल्द निर्माण शुरू होगा।
साथ ही, स्कूलों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत अब तक 8,000 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, ताकि बच्चों में आपदा सुरक्षा की संस्कृति विकसित की जा सके।
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