
द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/भुवनेश्वर (19 फरवरी 2026)
बिहार सरकार राज्य के श्रमिकों को बेहतर कार्यशर्तें, सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार द्वारा 29 पुराने कानूनों को समाहित कर बनाई गई चार नई श्रम संहिताएं बिहार में 21 नवंबर 2025 से ही प्रभावी ढंग से लागू कर दी गई हैं। इससे न केवल औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधे लाभ पहुंचेगा।
भुवनेश्वर क्षेत्रीय सम्मेलन में बिहार की धमक
ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित “श्रम संहिता और अन्य पहलुओं पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चौथे क्षेत्रीय सम्मेलन” में बिहार ने अपनी प्रगति साझा की।
- प्रतिनिधित्व: श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के सचिव दीपक आनन्द ने सम्मेलन में बिहार का पक्ष रखा।
- प्रतिभागी: इस दो दिवसीय सम्मेलन में बिहार के अलावा ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
नई संहिताओं से क्या बदलेगा?
सचिव दीपक आनन्द ने स्पष्ट किया कि इन सुधारों से राज्य के लाखों श्रमिकों के जीवन में बड़े बदलाव आएंगे:
- न्यूनतम मजदूरी: वेतन संहिता 2019 के तहत अब सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित कर दी गई है।
- सामाजिक सुरक्षा: गिग (Gig) और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अब पहली बार पेंशन, बीमा और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
- मूल वेतन में वृद्धि: अब वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन (Basic Pay) के रूप में होगा, जिससे पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी की राशि में बढ़ोत्तरी होगी।
- कार्य के घंटे: सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे कार्य की सीमा निर्धारित की गई है।
- महिला सुरक्षा: महिलाओं के लिए रात की शिफ्ट में सुरक्षित कार्य परिवेश सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के माध्यम से उद्योगों के संचालन को सरल बनाया गया है, जिससे राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होगा। सचिव ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य इन संहिताओं का लाभ राज्य के शत-प्रतिशत श्रमिकों तक पहुँचाना है। सम्मेलन के दौरान विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. गणेश कुमार झा भी उपस्थित रहे।
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