बिल गेट्स के संबंध में आरजेडी सांसद ने बिहार सरकार को लिखा पत्र, उठाए गंभीर सवाल

बिहार में विधानसभा का बजट सत्र और दिल्ली में संसद का सत्र चल रहे हैं। इसी बीच, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के नाम से जुड़े विवादों के चलते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। सांसद ने अपने पत्र में बिहार में गेट्स फाउंडेशन की गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं।

बिल गेट्स को लेकर जताई चिंता

बिहार की राजनीति में अब वैश्विक मुद्दों की चर्चा भी होने लगी है। सुधाकर सिंह ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि गेट्स फाउंडेशन बिहार सरकार के साथ कई नीतिगत पहलों में सक्रिय है। उन्होंने आरोप लगाया कि फाउंडेशन द्वारा नियुक्त लोग बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विभागों के सहायक के रूप में काम कर रहे हैं और उन्हें लाखों रुपये वेतन दिया जा रहा है। इससे संबंधित नीतिगत निर्णयों और योजनाओं की जानकारी उन्हें आसानी से उपलब्ध हो रही है।

“बिहार राज्य के सांसद के तौर पर मुझे यह जानकर काफ़ी आश्चर्य हुआ कि बिल गेट्स की संस्था गेट्स फाउंडेशन बिहार सरकार के साथ कई नीतिगत पहलुओं पर अधिकृत तथा कुछ मामलों में गैर-अधिकृत तौर पर काम कर रही है। उन्हें लाखों रुपये वेतन दिए जा रहे हैं और बिहार सरकार के कई विभागों से जुड़े अहम नीतिगत फैसलों की जानकारी आसानी से मिल रही है।” – सुधाकर सिंह, सांसद, आरजेडी

बिहार में गेट्स फाउंडेशन की सक्रियता

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सुधाकर सिंह ने सरकार से पूछा कि यदि गेट्स या उनकी संस्था के साथ कोई समझौता (MoU) या परियोजना चल रही है, तो उसकी शर्तें सार्वजनिक की जाएं। उन्होंने पारदर्शिता और जनहित की दृष्टि से स्पष्ट जवाब मांगा।

“जेफरी एपस्टीन से जुड़े लोगों के खिलाफ पूरी दुनिया में आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। ऐसे में हैरानी की बात है कि बिल गेट्स अभी भी गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन हैं और संस्था उनके निर्देशन में चल रही है।” – सुधाकर सिंह

नीतिगत सवाल भी उठाए

सांसद ने बिहार सरकार से कई सवाल किए हैं:

  • राज्य में गेट्स फाउंडेशन की भूमिका क्या है?
  • स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा परियोजनाओं का वित्तीय ढांचा क्या है?
  • इन परियोजनाओं से जुड़ा कोई डेटा संग्रह या नीति निर्धारण प्रभावित हो रहा है?
  • परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही किसके पास है?

अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं

सुधाकर सिंह पहले भी कृषि और नीतिगत मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनके इस पत्र ने बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर दी है, लेकिन फिलहाल सरकार या किसी अधिकारी ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

 

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