द वॉयस ऑफ बिहार | मोतिहारी (19 फरवरी 2026)
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की एक विशेष अदालत ने मानवता को शर्मसार करने वाले मामले में कड़ा फैसला सुनाया है。 पैसों के लालच में एक नाबालिग बच्ची को देह व्यापार के दलदल में धकेलने वाली आरोपी महिला को न्यायालय ने दोषी पाते हुए जेल भेज दिया है。
न्यायालय का कड़ा फैसला
पॉक्सो (POCSO) अदालत संख्या-3 के न्यायाधीश मिथिलेश कुमार झा ने मोतिहारी के अगरवा निवासी रीता देवी (पति- स्वर्गीय अजय पासवान) को सजा सुनाई:
- सजा: 10 वर्ष का सश्रम कारावास。
- जुर्माना: 20 हजार रुपये का अर्थदंड。
- विशेष निर्देश: जुर्माने की यह राशि पीड़िता को दी जाएगी。 यदि महिला जुर्माना नहीं भरती है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा。
क्या था पूरा मामला?
यह मामला बंजरिया थाना कांड संख्या 659/2023 से जुड़ा है:
- लापता हुई थी बच्ची: 1 जून 2023 को पीड़िता के पिता ने अपनी पुत्री के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी。
- सहेली ने पहुँचाया आरोपी के पास: पुलिस जांच में पता चला कि पीड़िता अपनी सहेली चांदनी कुमारी के घर गई थी, जहाँ से उसे रीता देवी के पास छोड़ दिया गया。
- जबरन देह व्यापार और गर्भावस्था: आरोपी रीता देवी ने पैसों के लालच में नाबालिग से जबरन देह व्यापार कराना शुरू किया。 इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई。
- अस्पताल से हुई बरामदगी: आरोपी महिला गर्भपात कराने के लिए पीड़िता को सदर अस्पताल लेकर आई थी, जहाँ पहचान होने पर पुलिस को सूचना दी गई और उसे रेस्क्यू किया गया。
अभियोजन पक्ष की दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने अभियोजन की ओर से आठ गवाह पेश किए。 कोर्ट ने सभी गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर रीता देवी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366A और 372 के तहत दोषी करार दिया。
यह फैसला समाज में उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो नाबालिगों का शोषण कर उन्हें अपराध की दुनिया में धकेलते हैं。
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