द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (19 फरवरी 2026)
भारतीय रेलवे अब परिचालन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का हाथ थाम रही है। इसी कड़ी में मालदा रेल मंडल के एडीआरएम (ADRM) शिव कुमार प्रसाद ने बुधवार को भागलपुर कोचिंग डिपो का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेलवे की नई ‘सिग्नल ऑन स्क्रीन’ तकनीक और चालक दल (Crew) की सुविधाओं का जायजा लिया।
डिजिटल वीडियो सिस्टम: अब चूक की गुंजाइश नहीं
एडीआरएम ने बताया कि क्रू लॉबी में अब डिजिटल वीडियो सिस्टम इंस्टॉल किया गया है। यह सिस्टम रेल परिचालन में सुरक्षा की एक नई परत जोड़ेगा।
- क्या है सुविधा: अब लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर अपनी ड्यूटी शुरू करने से पहले क्रू लॉबी में लगी स्क्रीन पर ही अपने रूट के सिग्नलों की वास्तविक स्थिति देख सकेंगे।
- कवर होने वाले रेल खंड: 1. भागलपुर – साहिबगंज – किऊल सेक्शन। 2. भागलपुर – दुमका – गोड्डा – बांका सेक्शन।
- ट्रेनिंग: इस नई प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए इंजन पायलटों और ट्रेन मैनेजरों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रनिंग रूम में सुविधाओं का ‘टेस्ट’
रेलवे सुरक्षा में लोको पायलटों की मानसिक और शारीरिक स्थिति सबसे अहम होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एडीआरएम ने रनिंग रूम की व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा:
- ठहरने की व्यवस्था: लोको पायलटों के विश्राम के लिए कमरों की गुणवत्ता देखी गई।
- खान-पान और सफाई: भोजन की शुद्धता, पीने के पानी की उपलब्धता और शौचालयों की स्वच्छता का निरीक्षण किया गया।
- निर्देश: एडीआरएम ने स्पष्ट किया कि चालक दल के आराम और खान-पान में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि सुरक्षित परिचालन का सीधा संबंध उनके स्वास्थ्य से है।
सुरक्षित सफर की ओर बढ़ता कदम
निरीक्षण के दौरान एडीआरएम शिव कुमार प्रसाद ने क्रू लॉबी और रनिंग रूम के स्टाफ से भी बातचीत की और परिचालन को सुगम बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। भागलपुर कोचिंग डिपो में हो रहे ये बदलाव न केवल कर्मचारियों के लिए मददगार साबित होंगे, बल्कि यात्रियों के सफर को भी और अधिक सुरक्षित बनाएंगे।
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