भागलपुर में झोलाछाप चला रहे थे हॉस्पिटल; एक्सपायर्ड दवाएं और भारी गंदगी मिलने पर दो क्लीनिक सील, लगा भारी जुर्माना

द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (19 फरवरी 2026)

​भागलपुर स्वास्थ्य विभाग ने शहर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शहर के दो निजी अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया है। इन अस्पतालों में न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ हो रहा था।

1. अमित सेवा सदन: बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था क्लीनिक

​शहर के घाट रोड, आदमपुर स्थित ‘अमित सेवा सदन’ (प्राथमिक उपचार केंद्र) की जब जांच की गई, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था।

  • झोलाछाप का कब्जा: जांच टीम ने पाया कि क्लीनिक को एक अनधिकृत (झोलाछाप) डॉक्टर चला रहा था। मौके पर कोई भी डिग्रीधारी डॉक्टर या प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था।
  • दस्तावेजों का अभाव: क्लीनिक के पास न तो क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन था और न ही प्रदूषण प्रमाण पत्र।
  • संक्रमण का खतरा: बायोमेडिकल कचरे (मेडिकल वेस्ट) के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे आसपास के इलाके में संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ था।
  • कार्रवाई: सिविल सर्जन ने क्लीनिक को बंद करने का आदेश देते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

2. लॉन्ग लाइफ हॉस्पिटल: एक्सपायर्ड दवाएं और डबल नाम का खेल

​जीरोमाइल (तारा मंदिर के सामने) संचालित ‘लोंग लाइफ हॉस्पिटल’ में भी भारी अनियमितताएं पाई गईं।

  • नाम में हेरफेर: अस्पताल के बाहर ‘लाइफ केयर इमरजेंसी हॉस्पिटल’ का बोर्ड लगा था, जबकि अंदर ‘लॉन्ग लाइफ हॉस्पिटल’ का नाम चल रहा था।
  • मरीजों की जान से खिलवाड़: जांच के दौरान अस्पताल में एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) दवाएं बरामद हुईं। यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम का सीधा उल्लंघन और दंडनीय अपराध है।
  • प्रशिक्षण शून्य: यहां भी न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया था।
  • कार्रवाई: सिविल सर्जन ने इस अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील करने का निर्देश दिया है और 50 हजार रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया है।

सिविल सर्जन की कड़ी चेतावनी

​सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है।

  1. जुर्माना: दोनों संस्थानों को 50-50 हजार रुपये का जुर्माना सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करने को कहा गया है।
  2. कानूनी कार्रवाई: यदि आदेश के बाद भी ये क्लीनिक चोरी-छिपे खुले पाए गए, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

​स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई से शहर के अन्य अवैध क्लीनिक संचालकों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इलाज के लिए केवल निबंधित (Registered) अस्पतालों में ही जाएं।

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