भागलपुर: ‘रिश्तेदार’ बनकर साइबर ठगों ने युवती को चूना लगाया; बातों-बातों में परिवार के नाम बताए और उड़ा लिए 92 हजार रुपये

द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर/लोदीपुर

​स्मार्ट सिटी भागलपुर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ का सहारा लेकर एक परिवार की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला है। लोदीपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती गुलाफसा परवीन से शातिर ठगों ने खुद को रिश्तेदार बताकर 92 हजार रुपये की ठगी कर ली। बुधवार को पीड़िता अपने परिजनों के साथ शिकायत दर्ज कराने साइबर थाना पहुंची।

कैसे बुना गया ठगी का जाल?

​युवती ने पुलिस को बताया कि उसके पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने बड़ी चालाकी से खुद को उसका करीबी रिश्तेदार बताया।

  • भरोसा जीतने का तरीका: ठग ने बातों-बातों में युवती के परिवार के सदस्यों के नाम और कुछ निजी जानकारियां साझा कीं। यह सुनकर गुलाफसा को विश्वास हो गया कि कॉल करने वाला वास्तव में कोई रिश्तेदार ही है, जिसका नंबर उसके फोन में सेव नहीं है।
  • इमोशनल कार्ड: ठग ने झूठ बोला कि परिवार का एक सदस्य गंभीर रूप से बीमार है और उसे तुरंत इलाज के लिए पैसों की जरूरत है।

92 हजार का ट्रांजैक्शन और खुलासा

​रिश्तेदार की ‘मदद’ करने के नाम पर युवती ने बताए गए खाते में कुल 92 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

  • सच्चाई आई सामने: पैसे भेजने के बाद जब युवती ने अपने परिवार के सदस्यों को पूरी बात बताई, तो हड़कंप मच गया। परिजनों ने स्पष्ट किया कि किसी भी रिश्तेदार ने पैसों की मांग नहीं की है और न ही कोई बीमार है। तब जाकर युवती को अहसास हुआ कि वह साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुकी है।

थानों के चक्कर काट रहे परिजन

​युवती के पिता साबिर के अनुसार, घटना के बाद वे पहले लोदीपुर थाना गए, जहां से उन्हें साइबर थाना भेजा गया।

  • लगातार दौड़: परिजन मंगलवार को भी साइबर थाना आए थे और बुधवार को फिर से शिकायत दर्ज कराने पहुंचे।
  • ऑनलाइन कंप्लेंट: पिता ने बताया कि नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा दी गई है और पुलिस को वह मोबाइल नंबर भी सौंप दिया गया है जिससे कॉल आई थी।

​साइबर पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और बैंक खाते के विवरण को खंगाल रही है जिसमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।

सतर्कता ही बचाव है: इन बातों का रखें ध्यान

  1. पहचान की पुष्टि करें: यदि कोई अज्ञात नंबर से रिश्तेदार बनकर पैसे मांगे, तो फोन काटने के बाद अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से उस व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करें।
  2. जल्दबाजी न करें: ठग अक्सर ‘इमरजेंसी’ या ‘बीमारी’ का हवाला देकर आपको सोचने का मौका नहीं देते। बिना पुष्टि किए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन न करें।
  3. निजी जानकारी साझा न करें: सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से ठग आपके परिवार की जानकारी जुटा लेते हैं, इसलिए अनजान कॉल पर किसी भी जानकारी को सच न मानें।

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