द वॉयस ऑफ बिहार | पटना (18 फरवरी 2026)
बिहार में गन्ने की खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में गन्ना उद्योग विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग द्वारा संचालित गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत चतुर्थ रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य के 324 किसानों को परमिट जारी किया गया है। अब तक 300 से अधिक किसानों ने आधुनिक यंत्रों की खरीद कर अपने खेतों को तकनीक से जोड़ लिया है।
11 प्रकार के आधुनिक यंत्रों पर भारी छूट
गन्ने की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक की मेहनत और लागत को कम करने के लिए सरकार 50 से 60 फीसदी तक अनुदान दे रही है। इस योजना में शामिल प्रमुख यंत्रों की सूची इस प्रकार है:
- तैयारी और बुवाई: डिस्क हैरो, रोटावेटर, मिनी ट्रैक्टर (4WD) और शुगरकेन कटर प्लांटर।
- रखरखाव: पावर वीडर, पावर टीलर, लेजर लेवलर और रैटून मैनेजमेंट डिवाइस।
- सुरक्षा: ट्रैक्टर माउंटेड हाइड्रॉलिक स्प्रेयर।
चीनी मिलों में लगे कैंप: मौके पर ही हुआ वितरण
किसानों की सुविधा के लिए विभाग ने राज्य की विभिन्न चीनी मिलों में विशेष यंत्रीकरण कैंप आयोजित किए।
- बगहा और चंपारण: 5-6 फरवरी को बगहा, लौरिया, मझौलिया, नरकटियागंज और हरिनगर मिलों में स्वयं गन्ना उद्योग मंत्री श्री संजय कुमार ने यंत्र वितरित किए।
- अन्य जिले: 9 से 14 फरवरी के बीच सुगौली, सिधवलिया, विष्णु, प्रतापपुर, हसनपुर (समस्तीपुर) और रीगा (सीतामढ़ी) चीनी मिलों में कैंप लगाए गए, जहाँ बड़ी संख्या में किसानों ने बुकिंग और खरीद की।
अपर मुख्य सचिव का बयान
गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के. सेंथिल कुमार ने बताया:
”बिहार में गन्ने की खेती को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। यंत्रीकरण योजना के माध्यम से हमारा लक्ष्य किसानों को अनुदानित दरों पर आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी लागत घटे और उत्पादन में वृद्धि हो।”
द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: खेती में तकनीक की नई मिठास
बिहार के गन्ना बेल्ट (खासकर उत्तर बिहार) के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब तक गन्ना किसान पारंपरिक और थकाऊ तरीकों पर निर्भर थे, लेकिन रोटावेटर और कटर प्लांटर जैसे यंत्रों से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि खेती की गुणवत्ता भी सुधरेगी। सरकार का यह कदम गन्ने की मिठास को किसानों की जेब तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगा।


