मिस्ड कॉल से शुरू हुई ‘लव स्टोरी’ का अंत: 7 माह बाद पटना से बरामद हुई शेखपुरा की विवाहिता; प्रेमी पहले ही जा चुका है जेल

द वॉयस ऑफ बिहार | शेखपुरा/सिरारी

​शेखपुरा जिले की सिरारी थाना पुलिस ने आधुनिक तकनीक और मोबाइल टावर लोकेशन की मदद से एक बड़ी सफलता हासिल की है। सात महीने पहले अपने प्रेमी के साथ फरार हुई 19 वर्षीय विवाहिता को पुलिस ने पटना जिले के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चिरैया गांव से सुरक्षित बरामद कर लिया है।

मिस्ड कॉल से पनपा प्यार, शादी के बाद भी जारी रहा रिश्ता

​इस कहानी की शुरुआत दो साल पहले एक अनजान नंबर से आए ‘मिस्ड कॉल’ से हुई थी।

  • संपर्क: सिरारी थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती और पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र के सिकंदरा गांव निवासी मंतोष कुमार (पिता श्यामकिशोर प्रसाद) एक-दूसरे के करीब आए।
  • शादीशुदा थी युवती: हैरानी की बात यह है कि युवती की शादी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन प्रेम परवान चढ़ने के बाद वह अपने मायके में ही रह रही थी।
  • फरारी: करीब सात माह पूर्व, युवती अपने प्रेमी मंतोष के साथ घर छोड़कर फरार हो गई थी, जिसके बाद इलाके में काफी चर्चा हुई थी।

अपहरण की FIR और पुलिस की कार्रवाई

​बेटी के गायब होने के बाद उसकी मां ने सिरारी थाने में मंतोष कुमार के खिलाफ अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

  • प्रेमी की गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी (प्रेमी) मंतोष कुमार को दो महीने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
  • तकनीकी जांच: मंतोष की गिरफ्तारी के बावजूद युवती का सुराग नहीं मिल पा रहा था। सिरारी थाना के पुलिस सब इंस्पेक्टर निखिल भास्कर के नेतृत्व में टीम ने मोबाइल सर्विलांस और टावर लोकेशन का सहारा लिया, जिससे उसका ठिकाना बख्तियारपुर के चिरैया गांव में मिला।

कोर्ट में दर्ज होगा बयान

​बरामदगी के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी की:

  1. मेडिकल जांच: युवती को स्थानीय सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मेडिकल जांच कराई गई।
  2. कोर्ट में पेशी: युवती को पुलिस सुरक्षा में न्यायालय भेजा गया है, जहाँ उसका बयान कलमबद्ध कराया जाएगा। बयान के आधार पर ही तय होगा कि वह अपने मायके जाएगी, ससुराल या आगे की कोई और कानूनी दिशा तय होगी।

द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: डिजिटल युग के रिश्तों का कड़वा सच

​मिस्ड कॉल और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले प्रेम संबंधों में अक्सर इस तरह के कानूनी पेच फंस जाते हैं। इस मामले में पुलिस की तकनीकी कुशलता सराहनीय है, लेकिन सात महीनों का यह घटनाक्रम एक बार फिर सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है।

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