मुजफ्फरपुर में शराब का ‘बड़ा स्टॉक’ बरामद: सकरा में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक; विशनपुर बघनगरी से दो भाई गिरफ्तार

द वॉयस ऑफ बिहार | मुजफ्फरपुर/सकरा

​बिहार में शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने वाले माफियाओं के खिलाफ मुजफ्फरपुर पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के सकरा थाना क्षेत्र के विशनपुर बघनगरी गाँव में पुलिस ने छापेमारी कर अवैध शराब का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। इस कार्रवाई ने इलाके में चल रहे शराब सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।

गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल

​पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि विशनपुर बघनगरी गाँव के एक ठिकाने पर भारी मात्रा में बाहरी शराब की खेप उतारी गई है और इसे खपाने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीम ने चिह्नित स्थान की घेराबंदी कर अचानक धावा बोल दिया।

छापेमारी के मुख्य अंश:

  • गिरफ्तारी: मौके से दो शातिर शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अमरेश कुमार और उसके भाई के रूप में हुई है।
  • बरामदगी: पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध शराब की पेटियाँ जब्त की हैं, जिन्हें बहुत ही शातिर तरीके से छिपाकर रखा गया था।

डीएसपी शिवानी श्रेष्ठा ने दी विस्तृत जानकारी

​इस बड़ी कामयाबी को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में डीएसपी शिवानी श्रेष्ठा ने बताया कि पुलिस की यह कार्रवाई शराबबंदी कानून को पूर्णतः प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया:

​”जब्त शराब की खेप को कब्जे में ले लिया गया है और विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध तस्करी के पूरे नेटवर्क और मुख्य सरगना का पता लगाया जा सके।”

 

तस्करी के नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस

​पुलिस को संदेह है कि अमरेश और उसका भाई केवल मोहरे हैं और इस धंधे के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इनके मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि शराब की यह खेप कहाँ से आई थी और इसे कहाँ सप्लाई किया जाना था।

द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: कब थमेगा शराब का खेल?

​मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में इतनी भारी मात्रा में शराब मिलना पुलिस के चौकसी के दावों पर सवाल भी खड़ा करता है, लेकिन सकरा पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। “एक जगह इतनी शराब” का मिलना यह संकेत है कि तस्कर अब सुरक्षित ठिकानों की तलाश में गांवों के अंदरूनी हिस्सों का सहारा ले रहे हैं।

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