द वॉयस ऑफ बिहार | मुजफ्फरपुर/डेस्क
मुजफ्फरपुर में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हाल ही में पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए कुख्यात एटीएम फ्रॉड पप्पू सहनी की इलाज के दौरान मौत हो गई है। मौत के बाद अब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्थानीय लोग मुठभेड़ से पहले उसे पकड़कर उसकी जमकर पिटाई करते नजर आ रहे हैं।
कौन था पप्पू सहनी?
पप्पू सहनी जिले का एक शातिर अपराधी था, जो मुख्य रूप से एटीएम धोखाधड़ी (ATM Fraud) और लूट की वारदातों को अंजाम देता था।
- पुलिस से भिड़ंत: बीते कल पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पप्पू सहनी ने बेखौफ होकर पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग की थी।
- अधिकारी को लगी थी गोली: इस गोलाबारी में एक पुलिस पदाधिकारी को गोली लग गई थी, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया था।
- जवाबी कार्रवाई: आत्मरक्षार्थ पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें पप्पू सहनी के दोनों पैरों में गोली लगी थी।
इलाज के दौरान तोड़ा दम, अब पिटाई की तस्वीर वायरल
मुठभेड़ के बाद घायल पप्पू सहनी को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। लेकिन उसकी मौत के साथ ही अब सोशल मीडिया पर वह फुटेज चर्चा का विषय बना हुआ है जब वह पुलिस की पकड़ में आने से पहले ग्रामीणों के हत्थे चढ़ा था।
- जनता का आक्रोश: वायरल तस्वीर में देखा जा सकता है कि स्थानीय लोगों ने पप्पू सहनी को पकड़ रखा है और उसके साथ हाथापाई व पिटाई की जा रही है।
- भिड़ंत का दृश्य: वीडियो में साफ दिख रहा है कि आम लोगों के बीच उस अपराधी को लेकर कितना गुस्सा था, जो लंबे समय से इलाके में दहशत का पर्याय बना हुआ था।
पुलिस विभाग में शोक और राहत का मिला-जुला माहौल
पप्पू सहनी की मौत के बाद जहां एक ओर पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी के अंत पर राहत की सांस ली है, वहीं अपने घायल साथी पदाधिकारी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बनी हुई है।
- मुजफ्फरपुर पुलिस का रुख: वरीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून को हाथ में लेने वाले अपराधियों का अंत इसी तरह होता है। हालांकि, वायरल हो रही पिटाई की तस्वीर को लेकर पुलिस फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रही है।
द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: जब सब्र का बांध टूट जाए
पप्पू सहनी की पिटाई की वायरल तस्वीर यह दर्शाती है कि जब अपराधी पुलिस और कानून को चुनौती देने लगते हैं, तो आम जनता का सब्र भी जवाब दे जाता है। हालांकि कानून को हाथ में लेना सही नहीं है, लेकिन यह घटना अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक है कि जनता अब उनके आतंक को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।


