
द वॉयस ऑफ बिहार | मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)
बिहार में बोर्ड परीक्षाओं के कड़े नियमों के बीच मोतिहारी के पिपरा से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ परीक्षार्थियों के लिए एक मिनट की देरी भी भारी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक शिक्षक ने देरी से आने के बावजूद परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की कोशिश की। इस घटना के बाद वहां मौजूद अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और भारी हंगामे के बीच शिक्षक को उल्टे पाँव भागना पड़ा।
मजिस्ट्रेट साहब दिखा रहे थे ‘खास मेहरबानी’
पिपरा स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र महावीर उच्च विद्यालय के बाहर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक शिक्षक परीक्षा शुरू होने के काफी देर बाद पहुंचे।
- नियमों की अनदेखी: परीक्षा केंद्र पर तैनात दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) नियमों को ताक पर रखकर उक्त शिक्षक को अंदर प्रवेश दिलाने की जुगत में लगे थे।
- अभिभावकों का आक्रोश: केंद्र के बाहर मौजूद अभिभावकों ने जब यह भेदभाव देखा, तो उनका सब्र टूट गया। लोगों का कहना था कि जब बच्चों को देरी होने पर बाहर कर दिया जाता है, तो शिक्षकों के लिए अलग नियम क्यों?
हंगामा देख रफूचक्कर हुए ‘गुरुजी’
अभिभावकों की नाराजगी और भारी विरोध को देखते हुए मजिस्ट्रेट के पसीने छूट गए।
- बचाव की कोशिश: स्थानीय लोगों ने जैसे ही नारेबाजी और हंगामा शुरू किया, अंदर जाने की जिद कर रहे शिक्षक अपनी फजीहत होते देख मौके से रफूचक्कर हो गए।
- प्रशासन पर सवाल: आदर्श परीक्षा केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात मजिस्ट्रेट द्वारा शिक्षक को ‘स्पेशल एंट्री’ दिलाने की कोशिश ने प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: नियम सबके लिए बराबर हों
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने परीक्षा को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। ऐसे में केंद्र पर तैनात अधिकारियों द्वारा किसी खास व्यक्ति को फायदा पहुँचाने की कोशिश न केवल गलत है, बल्कि उन हजारों छात्रों के साथ अन्याय है जो समय की पाबंदी का पालन करते हैं। मोतिहारी की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सजग नागरिक ही व्यवस्था की मनमानी को रोक सकते हैं।


