आरा के जैन कॉलेज में ‘स्थापना दिवस’ पर मांसाहार का तड़का: कैंपस में बना मटन-चिकन, छात्र संगठनों ने किया जोरदार हंगामा; प्राचार्य पर गिरी गाज?

द वॉयस ऑफ बिहार | आरा (भोजपुर)

​भोजपुर जिले के प्रतिष्ठित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई, हर प्रसाद दास जैन (H.D. Jain) महाविद्यालय में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल शिक्षा जगत को शर्मसार किया है, बल्कि एक पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुँचाई है। महाविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में अतिथियों के स्वागत के लिए कॉलेज परिसर के भीतर ही मटन और चिकन बनवाए जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है।

जैन समाज की धरोहर पर ‘मांसाहार’ का कलंक

​एच.डी. जैन कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि जैन समाज की अमूल्य धरोहर माना जाता है। गौरतलब है कि जैन धर्म और समाज में मांस एवं मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है और संस्थान की स्थापना के समय से ही यहाँ की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता रहा है।

  • विवाद की जड़: आरोप है कि वर्तमान प्रधानाचार्य (प्राचार्य) की देखरेख में आयोजित समारोह के बाद, कॉलेज कैंपस के भीतर ही बड़े पैमाने पर मांसाहारी भोजन (मटन और चिकन) पकाया और परोसा गया।
  • पहली बार हुआ ऐसा: महाविद्यालय के पुराने कर्मियों और छात्रों का कहना है कि संस्थान के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब परिसर के भीतर इस तरह का अभक्ष्य भोजन बनाया गया हो।

अभाविप का उग्र प्रदर्शन, कॉलेज प्रबंधन ने साधी चुप्पी

​जैसे ही कैंपस में मटन-चिकन बनने की तस्वीरें और वीडियो बाहर आए, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज में मोर्चा खोल दिया।

  • हंगामा और नारेबाजी: छात्र नेताओं ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी की और इस कृत्य को शिक्षण संस्थान को “कलंकित” करने वाला बताया।
  • कार्रवाई की मांग: अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि प्राचार्य समेत उन तमाम अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए जो इस आयोजन के जिम्मेदार हैं।
  • मैनेजमेंट का रुख: इस पूरे बवाल पर फिलहाल कॉलेज प्रबंधन का कोई भी अधिकारी कैमरे के सामने बोलने को तैयार नहीं है, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है।

“धार्मिक आस्था और संस्थान की गरिमा से खिलवाड़”

​छात्र नेताओं का कहना है कि जिस पवित्र संस्थान की नींव अहिंसा और सात्विकता पर रखी गई हो, वहां इस तरह का आयोजन बर्दाश्त के बाहर है।

​”यह केवल भोजन का मामला नहीं है, यह हमारी परंपरा और इस कॉलेज के गौरवशाली इतिहास पर हमला है। प्राचार्य को इसके लिए जवाब देना होगा।” – स्थानीय छात्र नेता

द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: प्रशासन की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती?

​वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले इतने बड़े कॉलेज में इस तरह की चूक होना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या प्राचार्य को संस्थान की पृष्ठभूमि और जैन समाज की मान्यताओं का ज्ञान नहीं था? या फिर जानबूझकर नियमों को ताक पर रखा गया? इस घटना ने न केवल छात्र राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि शहर के बुद्धिजीवियों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

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