द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (विशेष रिपोर्ट)
बिहार के भागलपुर में अपराधियों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया, लेकिन अंततः सुरक्षा बलों के चक्रव्यूह में फंस गए। नाथनगर के रहमतबाग में एक निर्माणाधीन मकान के भीतर कपड़ा बुनाई (पावरलूम) के शोर के पीछे अवैध हथियारों का जखीरा तैयार किया जा रहा था। मंगलवार को बिहार और बंगाल के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इस ‘मौत की फैक्ट्री’ का पर्दाफाश किया।
लूम की खट-खट में दब जाती थी मशीनों की आवाज
रहमतबाग मोहल्ले के लोगों को लगता था कि मोहम्मद नासिर के मकान में दिन-रात लूम चलता है और कपड़ा बुनाई होती है। किसी को कानों-कान खबर नहीं थी कि उसी शोर की आड़ में मुंगेर के कारीगर पिस्टल के बैरल और ट्रिगर तैयार कर रहे थे। अपराधियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से ऊपर वाले तल पर गन फैक्ट्री स्थापित की थी। जब मंगलवार सुबह 10:30 बजे सादे लिबास में आधुनिक हथियारों से लैस जवान पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया।
बरामदगी और गिरफ्तारी का ब्योरा
सुरक्षा बलों ने करीब चार घंटे तक चली इस कार्रवाई में भारी मात्रा में अवैध सामान बरामद किया है:
- गिरफ्तारी: मौके से 5 हथियार कारीगरों को रंगे हाथों पकड़ा गया है।
- पिस्टल: जांच के दौरान 20 अधबनी पिस्टल बरामद की गईं, जिन्हें फिनिशिंग के बाद बाजार में सप्लाई किया जाना था।
- मशीनें: हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 3 भारी लेथ मशीनें और ड्रिलिंग उपकरण जब्त किए गए हैं।
- संदिग्ध दस्तावेज: एक लोहे के बक्से से कई पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और जमीन के कागजात मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
मास्टरमाइंड फैसल: मुंगेर से सीखा ‘हुनर’, भागलपुर को बनाया अड्डा
इस पूरी फैक्ट्री का सूत्रधार मोहम्मद फैसल बताया जा रहा है। फैसल मूल रूप से मुंगेर का रहने वाला है और उसने वहीं के पुराने तस्करों से हथियार बनाने की बारीकियां सीखी थीं।
- पुरानी हिस्ट्री: फैसल 2022 में भी चंपानगर में गन फैक्ट्री चलाने के मामले में नामजद रह चुका है।
- साजिश: मकान मालिक दिल्ली में रहता है। फैसल ने उससे ‘पावरलूम’ चलाने के नाम पर यह मकान किराए पर लिया था। पुलिस अब इस मामले में मकान मालिक की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पड़ोसी राज्य की पुलिस से मिले इनपुट पर बड़ी कार्रवाई
इस कार्रवाई की पटकथा पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में लिखी गई थी। दरअसल, वहां की पुलिस ने हाल ही में कुछ अपराधियों को हथियारों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि वे ये हथियार भागलपुर के रहमतबाग से खरीदकर लाए थे। इसके बाद बंगाल एसटीएफ ने बिहार पुलिस के साथ तालमेल बिठाया और मंगलवार को यह संयुक्त अभियान सफल रहा।
अधिकारियों का बयान
नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) शैलेंद्र कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मीडिया को बताया:
”यह एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क है। हमने 5 कारीगरों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में उपकरण जब्त किए हैं। फरार मुख्य आरोपी फैसल की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें छापेमारी कर रही हैं। हम इसके ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ खंगाल रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कच्चा माल कहाँ से आता था और तैयार माल कहाँ भेजा जा रहा था।”
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: स्थानीय खुफिया तंत्र पर सवाल
घनी आबादी वाले रहमतबाग में पिछले 8 महीनों से मौत का यह कारोबार फल-फूल रहा था, लेकिन स्थानीय थाने को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह स्थानीय पुलिस के सूचना तंत्र की एक बड़ी विफलता मानी जा रही है। अगर पड़ोसी राज्य की पुलिस सटीक जानकारी साझा न करती, तो शायद यह फैक्ट्री अभी और लंबे समय तक चलती रहती।


