द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क
बिहार में कोचिंग संस्थानों की मनमानी और सुरक्षा में कोताही अब नहीं चलेगी। बिहार पुलिस ने राज्यभर के कोचिंग सेंटरों के लिए एक नई और सख्त नियमावली जारी की है। इस नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को न केवल बेहतर शिक्षा, बल्कि एक सुरक्षित, तनावमुक्त और पारदर्शी शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। अब पंजीकरण से लेकर सीसीटीवी और स्टाफ वेरिफिकेशन तक, हर मानक पर खरा उतरना अनिवार्य होगा।
1. अनिवार्य पंजीकरण और पुलिस सत्यापन
अब हर छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- डिस्प्ले: पंजीकरण संख्या को रिसेप्शन पर प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य है।
- स्टाफ वेरिफिकेशन: संस्थान में झाड़ू-पोछा करने वाले से लेकर पढ़ाने वाले शिक्षकों तक, सभी का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा।
- ड्राइवर: यदि कोचिंग अपनी बस या वैन चलाती है, तो चालक और खलासी का भी पुलिस सत्यापन अनिवार्य है।
2. सुरक्षा और डिजिटल निगरानी (CCTV & Biometric)
संस्थानों को अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था की गहराई से जांच करने के लिए ‘सिक्योरिटी ऑडिट’ कराने की सलाह दी गई है।
- सीसीटीवी: पूरे परिसर में कैमरों के जरिए 24×7 निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।
- हाजिरी: छात्रों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है।
- हेल्पलाइन: रिसेप्शन पर स्थानीय थाना, वरीय पुलिस अधिकारियों और आपातकालीन नंबर 112 के पोस्टर लगाना जरूरी है।
3. महिला सुरक्षा: ‘112 India App’ पर फोकस
छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने निर्देश दिया है कि संस्थानों को ‘112 India App’ के ‘महिला सुरक्षा’ (Women Safety) फीचर्स के बारे में जागरूकता फैलानी होगी। छात्राओं और स्टाफ को इसके उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना होगा।
4. आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर
बिना Fire NOC (अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अब कोचिंग सेंटर नहीं चल सकेंगे।
- मॉक-ड्रिल: आग, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए समय-समय पर छात्रों और स्टाफ के लिए ट्रेनिंग आयोजित करनी होगी।
- सुविधाएं: आपातकालीन निकास (Emergency Exit), साफ पेयजल, प्राथमिक उपचार (First Aid) और महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय अनिवार्य हैं।
5. मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग: अब छात्र नहीं होंगे अकेले
कोटा जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बिहार पुलिस ने मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया है:
- काउंसलिंग: संस्थानों को छात्रों के लिए करियर और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counselling) की व्यवस्था करनी होगी।
- अभिभावकों को सूचना: यदि कोई छात्र अवसाद (Depression) या असामान्य व्यवहार दिखाता है, तो तुरंत अभिभावकों को बताना होगा।
- परफॉर्मेंस रिपोर्ट: छात्र के टेस्ट रिजल्ट और क्लास से अनुपस्थिति की जानकारी मैसेज या नोटिफिकेशन के जरिए तुरंत अभिभावकों को देनी होगी।
द वॉयस ऑफ बिहार की चेतावनी: दलालों से बचें
पुलिस ने साफ किया है कि नामांकन के लिए दलालों (Agents) का सहारा लेने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिहार पुलिस का संदेश: “छात्रों का भविष्य केवल उनके अंकों से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से भी तय होता है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना और बंदी की कार्रवाई की जा सकती है।”


