योजनाओं का असली सच बताएगा AI: बिहार में साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन के लिए नई पहल; विकास आयुक्त ने अधिकारियों को दिया ‘रिस्क’ लेने का मंत्र

द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क

​बिहार की सरकारी योजनाओं के अपेक्षित परिणाम (Intended Outcome) और जमीनी हकीकत (Final Outcome) के बीच के फासले को पाटने के लिए योजना एवं विकास विभाग ने एक बड़ी कवायद शुरू की है। मंगलवार को विभाग के मूल्यांकन निदेशालय द्वारा “Evaluation in Government: Frameworks, Methods, and Reporting” विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्घाटन राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने किया।

विकास आयुक्त का मंत्र: क्षमता निर्माण और जोखिम लेने का साहस

​उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि योजनाओं के परिणामों में सुधार के लिए दो चीजें अनिवार्य हैं:

  1. Capacity Building: अधिकारियों का सतत क्षमता निर्माण।
  2. Taking Risk: नवाचार और सुधार के लिए आवश्यक जोखिम लेने का साहस। उन्होंने जोर दिया कि यदि अधिकारी डेटा-आधारित निर्णय और निष्पक्ष मूल्यांकन को अपनाते हैं, तो राज्य की प्रगति की रफ्तार दोगुनी हो सकती है।

डॉ. एस. सिद्धार्थ की सलाह: “अधिकारियों को अब AI Smart होना होगा”

​कार्यशाला का मुख्य आकर्षण पूर्व विकास आयुक्त डॉ. एस. सिद्धार्थ का सत्र रहा। उन्होंने “Use of AI in Data Analysis, Interpretation & Reporting” पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा:

  • एआई स्मार्ट: वर्तमान दौर में अधिकारियों को केवल तकनीकी रूप से दक्ष होना काफी नहीं, बल्कि “AI Smart” होना जरूरी है।
  • सटीक रिपोर्टिंग: बड़े आंकड़ों (Big Data) के विश्लेषण, रुझानों की पहचान और भविष्य के पूर्वानुमान (Forecasting) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है।
  • जिम्मेदारी: उन्होंने एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग और तकनीक-सक्षम निर्णय प्रक्रिया पर बल दिया।

मूल्यांकन निदेशालय बनेगा और भी मजबूत: अपर मुख्य सचिव

​योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि योजना विभाग राज्य की सभी विकास योजनाओं का एक समेकित (Cumulative) नजरिया रखता है। विभाग न केवल समन्वय करता है बल्कि राज्य की जीडीपी (State GDP) का आकलन भी करता है। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन निदेशालय की कार्यप्रणाली को अब और भी आधुनिक और वैज्ञानिक बनाया जा रहा है।

विषय विशेषज्ञों ने दिए गुर

​कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने मूल्यांकन के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाया:

  • डॉ. हरेंद्र प्रसाद: शासकीय मूल्यांकन का ढांचा और उद्देश्य।
  • मनोज नारायण (यूनिसेफ): मूल्यांकन अध्ययन की योजना और प्रभावी डिज़ाइन।
  • डॉ. चंद्र सिंह: सैम्पलिंग और डेटा संग्रहण की वैज्ञानिक विधियाँ।
  • डॉ. दिलीप कुमार: डेटा विश्लेषण और प्रभावी प्रतिवेदन लेखन (Report Writing)।
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