- बयानों में झोल: सीबीआई की पूछताछ में दारोगा रीना कुमारी के जवाब तत्कालीन थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और एसडीपीओ सचिवालय अन्नू के बयानों से मेल नहीं खाए; टाइमलाइन और पुलिस एक्शन पर गहराया संदेह।
- शिकंजा: सीबीआई अब छात्रा का इलाज करने वाले डॉक्टरों और सीनियर पुलिस अधिकारियों से भी करेगी पूछताछ; शुरुआती जांच में लापरवाही या लीपापोती का शक।
- नोटिस: राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी पटना को थमाया नोटिस; 8 सप्ताह के भीतर मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अगली सुनवाई 22 अप्रैल को।
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना/ब्यूरो)
पटना (Patna) में नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब महज एक हादसा नहीं रहा, बल्कि यह पुलिसिया बयानों और सिस्टम की खामियों का एक ‘क्राइम डोजियर’ (Crime Dossier) बन चुका है। केस की कमान संभालने के बाद सीबीआई (CBI) ने जांच की आंच तेज कर दी है। सोमवार को हुई पूछताछ में पुलिस अधिकारियों के बयानों में मिले विरोधाभास ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
दारोगा के जवाब से सीबीआई असंतुष्ट
सीबीआई ने सोमवार को चित्रगुप्त नगर थाने (Chitragupta Nagar PS) में तैनात दारोगा रीना कुमारी (SI Reena Kumari) से कई घंटों तक क्रॉस-एग्जामिनेशन किया। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दारोगा के जवाब लड़खड़ाते नजर आए।
- मिसमैच: दारोगा रीना कुमारी द्वारा बताई गई टाइमलाइन, मौके पर पुलिस की मौजूदगी और छात्रा की हालत को लेकर दिए गए बयान, तत्कालीन थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी (SHO Roshni Kumari) और एसडीपीओ सचिवालय अन्नू (SDPO Annu) के बयानों से बिल्कुल अलग निकले।
- संदेह: घटना की सूचना मिलने के वक्त और केस डायरी में दर्ज फैक्ट्स के बीच इस ‘कंट्राडिक्शन’ (Contradiction) ने सीबीआई को सतर्क कर दिया है। एजेंसी को शक है कि शुरुआती जांच में तथ्यों को सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं किया गया या फिर जानबूझकर लीपापोती की गई।
सीनियर अफसरों तक पहुंचेगी आंच?
सीबीआई के बिहार-झारखंड के संयुक्त निदेशक राजीव रंजन (Rajiv Ranjan) ने साफ किया है कि केस डायरी की स्टडी और गहन एनालिसिस जारी है।
- अगला कदम: एजेंसी अब उन डॉक्टरों से पूछताछ करेगी जिन्होंने छात्रा का शुरुआती इलाज किया था।
- तलब: सूत्रों की मानें तो अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिले, तो पटना पुलिस की एसआईटी (SIT) की निगरानी कर रहे आईजी सेंट्रल रेंज (IG Central Range) और एसएसपी पटना (SSP Patna) को भी पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। जांच अब पूरी तरह से ‘पुलिसिया कार्रवाई’ और ‘निर्णय प्रक्रिया’ पर केंद्रित हो गई है।
मानवाधिकार आयोग का अल्टीमेटम
इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission) ने भी सख्त रुख अपनाया है।
- आदेश: आयोग ने पटना एसएसपी को नोटिस जारी कर दो महीने (8 सप्ताह) के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
एक छात्रा की मौत और सिस्टम के इतने सारे झोल, सच का सामने आना बेहद जरूरी है।


