पटना: बिहार विधानसभा में आज सरकारी विद्यालयों में परचारी और क्लर्क पदों पर बहाली को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया। सदन में हुई चर्चा के दौरान सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और इसके लिए शिक्षा विभाग आवश्यक तैयारियों में जुट गया है।
रिक्त पदों से प्रभावित हो रही व्यवस्था
सदन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि विद्यालयों में परचारी (चपरासी) के पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही बहाली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जाएगी।
बीएसएससी के माध्यम से होगी बहाली
शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि परचारी और क्लर्क पदों की बहाली बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए राज्य के सभी जिलों से रिक्त पदों की सूची मांगी गई है।
उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में रिक्त पदों का विस्तृत ब्योरा जल्द उपलब्ध कराएं, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। जैसे ही सभी जिलों से सूची प्राप्त होगी, आयोग द्वारा अधिसूचना जारी कर चयन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
क्लर्क की कमी से प्रशासनिक कार्य प्रभावित
इससे पहले विपक्ष के विधायकों ने कहा कि विद्यालयों में क्लर्क की कमी के कारण कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों से जुड़े दस्तावेज, शैक्षणिक अभिलेख और अन्य कार्यालयी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में क्लर्क पदों पर बहाली से विद्यालयों की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।
सदन में मौजूद कई सदस्यों ने भी रिक्त पदों के कारण हो रही समस्याओं को उठाते हुए सरकार से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रशासनिक कर्मियों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और स्कूल प्रबंधन पर पड़ रहा है।
सरकार ने जताई उम्मीद
सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बहाली प्रक्रिया शुरू होगी और विद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन पदों पर नियुक्ति होने से अनुशासन, प्रबंधन और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनेगी।


