पटना: राजधानी पटना में निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के निशुल्क नामांकन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार जहां 25% सीटों पर पारदर्शी दाखिला सुनिश्चित करना चाहती है, वहीं कई निजी स्कूल अब भी अपनी इनटेक कैपेसिटी बताने से बच रहे हैं।
1315 में से सिर्फ 855 स्कूलों ने दिया डेटा
पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) साकेत रंजन के अनुसार जिले में कुल 1315 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें से अब तक:
- 855 स्कूलों ने इनटेक कैपेसिटी अपलोड की
- करीब 460 स्कूलों ने अब तक जानकारी नहीं दी
- RTE के तहत 4635 आवेदन मिले
- 2700 से अधिक आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं
माइनॉरिटी स्कूल RTE से बाहर
डीईओ ने स्पष्ट किया कि मिशनरी और कुछ अल्पसंख्यक संस्थानों जैसे सेंट जोसेफ, सेंट माइकल, डॉन बॉस्को सहित अन्य माइनॉरिटी स्कूलों को RTE के तहत अनिवार्य दाखिले से छूट मिली हुई है।
बड़े स्कूलों ने नहीं किया इनटेक अपडेट
विभागीय जानकारी के अनुसार कुछ बड़े और चर्चित स्कूलों ने अब तक इनटेक कैपेसिटी अपलोड नहीं की है। विभाग का कहना है कि सभी गैर-माइनॉरिटी स्कूलों के लिए यह अनिवार्य है, ताकि 25% आरक्षित सीटों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
सिर्फ चुनिंदा स्कूलों में ज्यादा आवेदन
हालांकि जिले में बड़ी संख्या में निजी स्कूल हैं, लेकिन लगभग 50 स्कूलों में ही अधिक आवेदन आए हैं। अभिभावक मुख्य रूप से ब्रांडेड स्कूलों जैसे लिट्रा वैली, त्रिभुवन और ज्ञान निकेतन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोमवार से शुरू होगी कार्रवाई
डीईओ साकेत रंजन ने कहा कि निर्धारित समय सीमा खत्म होने के बावजूद स्कूलों को अतिरिक्त समय दिया गया है। इसके बाद भी डेटा अपलोड नहीं करने वाले स्कूलों पर:
- मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया
- यू-डाइस कोड निरस्त करने की अनुशंसा
जैसी कार्रवाई की जाएगी।
25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित
RTE Act के तहत निजी स्कूलों में कक्षा एक की 25% सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। सरकार प्रति बच्चा करीब ₹11,000 सालाना राशि स्कूलों को देती है।
आय प्रमाण पत्र बना बड़ी बाधा
कई आवेदन आय प्रमाण पत्र के कारण रिजेक्ट हो रहे हैं।
- SC/ST/OBC/EBC: आय सीमा 1 लाख रुपये सालाना
- EWS: आय 2 लाख रुपये से कम
अभिभावकों का कहना है कि अंचल कार्यालय से 1 लाख से कम आय प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कत हो रही है, जिससे पात्र बच्चे भी वंचित हो रहे हैं।
इनटेक कैपेसिटी में गड़बड़ी का शक
विभाग के अनुसार कई स्कूल पिछले सत्र में 100 से अधिक नामांकन के बावजूद अब इनटेक कैपेसिटी 30–50 दिखा रहे हैं। नामांकन सत्र के बाद स्कूलों की जांच की जाएगी।
अधिकारियों का क्या कहना है
डीईओ साकेत रंजन ने कहा कि जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना विभाग की प्राथमिकता है और नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी।


