जमुई के अखाड़े में ‘माटी का बल’: 188 पहलवानों का दंगल शुरू; डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बोले- ‘समृद्धि बढ़ाएगा खेल’, श्रेयसी सिंह का लक्ष्य- ओलंपिक

  • दंगल का आगाज: जमुई के एस.के. सिंह मेमोरियल स्टेडियम में ‘माटी का बल’ कुश्ती प्रतियोगिता शुरू; उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया विधिवत उद्घाटन।
  • प्रतिभाओं का जमावड़ा: बिहार के कोने-कोने से पहुंचे 188 महिला और पुरुष पहलवान दिखा रहे हैं दम; खेल विभाग और कुश्ती संघ का संयुक्त प्रयास।
  • ओलंपिक पर नजर: खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने भरी हुंकार- ‘हमारा सपना है बिहार के खिलाड़ी ओलंपिक में शामिल हों’; इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का पूरा जोर।

द वॉयस ऑफ बिहार (जमुई)

​बिहार की पारंपरिक कुश्ती और ‘मल्लयुद्ध’ की गौरवशाली परंपरा को फिर से जीवंत करने के लिए जमुई (Jamui) में एक ऐतिहासिक पहल हुई है। शनिवार (14 फरवरी 2026) को शहर के एस.के. सिंह मेमोरियल स्टेडियम में दो दिवसीय ‘माटी का बल- दंगल’ (Mati Ka Bal – Dangal) प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ।

परंपरा और शौर्य का संगम

​उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने कहा कि जमुई की धरती पर यह आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का मंच है।

  • समृद्धि का संकल्प: उन्होंने कहा कि खेल भावना के साथ बिहार में समृद्धि बढ़े, यही सरकार का संकल्प है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग दे रही है।
  • आधारभूत ढांचा: डिप्टी सीएम ने बताया कि बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

श्रेयसी सिंह का ‘ओलंपिक मिशन’

​कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि और बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह (Shreyasi Singh) ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जमुई की माटी में खेल प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है।

  • बड़ा लक्ष्य: श्रेयसी सिंह ने कहा, “एक खिलाड़ी और खेल मंत्री होने के नाते मैं आश्वस्त करती हूं कि बिहार को खेल में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हमारा लक्ष्य है कि ओलंपिक में बिहार के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित हो।”

ये रहे मौजूद

​इस मौके पर पूर्व मंत्री और विधायक दामोदर रावत, जमुई डीएम नवीन कुमार, एसपी विश्वजीत दयाल, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक रविंद्र नाथ चौधरी, बिहार कबड्डी संघ के अध्यक्ष विशाल कुमार सिंह समेत कई गणमान्य लोग और अधिकारी उपस्थित रहे।

मिट्टी के अखाड़े से ओलंपिक तक का सपना देखना एक नई शुरुआत है।

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