- ढाई दशक बाद फैसला: महिला की आत्महत्या के 25 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला; एडीजे-13 की अदालत ने पति संजय मोदी को माना दोषी
- जुर्माना भी लगा: 5 साल की सजा के साथ 10 हजार का अर्थदंड; पैसा नहीं देने पर काटनी होगी 3 महीने की अतिरिक्त जेल
- मायागंज में छोड़कर भागा था: प्रताड़ना से तंग आकर प्रीति ने खाया था जहर; इलाज के दौरान पति शव छोड़कर हो गया था फरार
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)
भागलपुर व्यवहार न्यायालय में शुक्रवार को न्याय की एक लंबी लड़ाई का अंत हुआ। एडीजे-13 (ADJ-13) की अदालत ने 25 साल पुराने एक मामले में फैसला सुनाते हुए पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पति संजय मोदी को दोषी करार दिया और उसे 5 साल की सजा सुनाई।
क्या था पूरा मामला?
सजा पाने वाले संजय मोदी और मृतका प्रीति की शादी वर्ष 2000 में हुई थी। प्रीति का मायके मुंगेर जिले के नया गांव में था।
- प्रताड़ना: शादी के एक साल बाद ही, 6 अगस्त 2001 की रात प्रीति को ससुराल में बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।
- आत्महत्या: इस प्रताड़ना से तंग आकर अगले ही दिन, यानी 7 अगस्त 2001 को प्रीति ने जहर खा लिया।
शव छोड़कर भागा था निर्दयी पति
इस मामले में पति की क्रूरता यह थी कि जहर खाने के बाद जब प्रीति को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल लाया गया, तो उसकी मौत हो गई। इसके बाद संजय मोदी पत्नी का शव अस्पताल में ही लावारिस छोड़कर फरार हो गया था।
- केस दर्ज: सबौर थाना के तत्कालीन दफादार जनक सिंह ने 7 अगस्त 2001 को मायागंज में पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराया था, जिसके आधार पर यह केस चला।
सजा का ऐलान
सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले एपीपी पवन कुमार ठाकुर ने बताया कि कोर्ट ने अभियुक्त पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि वह यह राशि जमा नहीं करता है, तो उसे तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।


