- गुलामी की निशानियों से आजादी: पीएम मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन 1-2 का किया शुभारंभ
- किसानों-युवाओं को तोहफा: नए भवन में प्रवेश करते ही पीएम ने लिए 4 अहम फैसले; कहा- यह इमारत राजा की नहीं, 140 करोड़ भारतीयों की है
- डाक टिकट जारी: इस ऐतिहासिक मौके पर ‘सेवा तीर्थ’ के नाम का सिक्का और डाक टिकट भी किया गया लॉन्च
द वॉयस ऑफ बिहार (नई दिल्ली)
देश की सत्ता का केंद्र अब बदल गया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर का उद्घाटन किया, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Tirth) नाम दिया गया है। इसके साथ ही कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी उद्घाटन हुआ। अब भारत सरकार का कामकाज इन्हीं नई इमारतों से संचालित होगा।
गुलामी की सोच से मुक्ति का प्रतीक
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने पुरानी सरकारी इमारतों को अंग्रेजों और गुलामी का प्रतीक बताया।
- नया इतिहास: उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकसित होने की दिशा में बढ़ रहा है, गुलामी की मानसिकता और निशानियों को पीछे छोड़ना जरूरी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि आजादी के बाद भी हम उन्हीं निशानियों को ढो रहे थे।
- विकसित भारत: पीएम ने कहा कि ये नए भवन विकसित भारत की दिशा में एक अहम पड़ाव हैं और आज हर देशवासी एक नए इतिहास का साक्षी बन रहा है।
पहले ही दिन 4 बड़े फैसले
’सेवा तीर्थ’ में कार्यभार संभालते ही प्रधानमंत्री एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने अपनी पहली ही कलम से समाज के चार प्रमुख वर्गों के लिए बड़े निर्णय लिए:
- किसान
- महिलाएं
- युवा
- कमजोर वर्ग पीएम ने कहा कि यहां लिए गए फैसले किसी शासक की इच्छा नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करेंगे।
इस अवसर पर पीएम ने एक विशेष स्मारक डाक टिकट और एक सिक्का भी जारी किया, जिस पर ‘सेवा तीर्थ’ का नाम अंकित है।


