बिहार में वैलेंटाइन डे पर ‘लठमार’ तैयारी: नारा गूंजा- ‘जहां मिलेंगे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना’; RJD ने किया समर्थन, तो हिंदू संगठनों का अल्टीमेटम

  • विरोध का अनूठा तरीका: कहीं लठ की पूजा, तो कहीं विवादित बयान; हिंदू संगठनों ने पार्कों में ‘अश्लीलता’ फैलाने वालों को दी चेतावनी
  • राजनीति भी तेज: RJD ने वैलेंटाइन को बताया ‘अच्छा कल्चर’, सीएम नीतीश भी कर चुके हैं प्यार का समर्थन; JDU नेताओं की अलग राय
  • संस्कृति की दुहाई: घूंघट और दुपट्टे वाली परंपरा बनाम वैलेंटाइन बाबा; सार्वजनिक जगहों पर मर्यादा लांघने वालों पर कार्रवाई की मांग

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना डेस्क)

​आज 14 फरवरी है और पूरा देश वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day) मना रहा है, लेकिन बिहार में प्यार के इस दिन पर ‘पहरे’ और ‘सियासत’ दोनों हावी हैं। एक तरफ प्रेमी जोड़े इस दिन को सेलिब्रेट करने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ कई संगठन इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। स्थिति यह है कि विरोध करने वाले संगठनों ने नारा दिया है- “जहां मिलेंगे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना”

‘लठ पूजन’ बनाम ‘प्यार करने वाले डरते नहीं’

​90 के दशक में फिल्म का गाना ‘प्यार करने वाले कभी डरते नहीं’ युवाओं का एंथम बन गया था और धीरे-धीरे पश्चिमी सभ्यता का यह त्योहार भारतीय युवाओं के सिर चढ़कर बोलने लगा। लेकिन आज बिहार में इसका विरोध भी उसी तीव्रता से हो रहा है।

  • विरोध: कई जगहों पर हिंदू संगठनों ने लाठियों की पूजा (Lathi Puja) की है और पार्कों में निगरानी बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यह पश्चिमी संस्कृति है, जो सनातनी परंपरा के खिलाफ है
  • चेतावनी: संगठनों ने साफ कहा है कि इतिहास गवाह है कि प्रेम पर पहरे लगते रहे हैं। अगर युवा जोड़े पार्कों में अश्लीलता फैलाते पकड़े गए, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

सियासत: RJD का ‘प्यार’ तो JDU की ‘नसीहत’

​वैलेंटाइन डे पर बिहार की राजनीति भी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है।

  • नीतीश और RJD का रुख: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा में पहले ही कह चुके हैं कि बिहार में प्यार पर कोई पहरा नहीं लगेगा। वहीं, आरजेडी (RJD) वैलेंटाइन डे को एक ‘अच्छा कल्चर’ मानती है और प्रेम का समर्थन करती है
  • जेडीयू और अन्य: वहीं, जेडीयू के कुछ नेताओं और सामाजिक संगठनों का मानना है कि आधुनिकता और ‘वैलेंटाइन बाबा’ की सीख ने युवाओं को विवश कर दिया है, जबकि हमारी संस्कृति महिलाओं को मर्यादा (घूंघट/दुपट्टे) में रहने की सीख देती है

पब्लिक प्लेस पर मर्यादा जरूरी

​विरोध के स्वर के बीच एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि प्रेम का अपना इतिहास है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों की मर्यादा भी अहम है। यदि 14 फरवरी के नाम पर सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता फैलाई जाती है, तो उस पर कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया जा सकता।

वैलेंटाइन डे पर हर साल यह टकराव देखने को मिलता है।

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