भागलपुर पुलिस की नई पहल:बच्चों के अधिकार और ग्राम कचहरी के कामकाज पर मिली ट्रेनिंग

  • IG के निर्देश पर कार्यशाला: नगर भवन में जुटे जिले के सभी इंस्पेक्टर और थानेदार; POCSO और किशोर न्याय अधिनियम का पढ़ाया गया पाठ
  • संवेदनशीलता जरूरी: पुलिस को निर्देश- बाल पीड़ितों की पहचान रखें गुप्त, थाने में हो मानवीय व्यवहार और तय समय में पूरा करें अनुसंधान
  • ग्राम कचहरी पर फोकस: गांव की अदालत के कार्यों और दायित्वों से भी अवगत हुए पुलिस पदाधिकारी; समन्वय बढ़ाने पर जोर

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)

​भागलपुर में पुलिसिंग को और अधिक संवेदनशील और कानून सम्मत बनाने के लिए शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। पुलिस महानिरीक्षक (IG), पूर्वी क्षेत्र के निर्देश पर नगर भवन (Town Hall) में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के सभी पुलिस निरीक्षकों और थानाध्यक्षों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को बच्चों के अधिकारों, त्वरित न्याय और ग्राम कचहरी की कार्यप्रणाली के प्रति जागरूक करना था।

मासूमों को न्याय दिलाने के लिए ‘स्पेशल ट्रेनिंग’

​कार्यशाला में सबसे ज्यादा जोर किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act 2015) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act 2012) पर दिया गया। पुलिस पदाधिकारियों को बताया गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए।

  • शब्दावली और नियम: ट्रेनिंग के दौरान बच्चों की श्रेणियों— CNCP (देखभाल और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चे) और CCL (विधि विवादित किशोर) के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही बाल कल्याण समिति (CWC) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB) की भूमिका पर चर्चा की गई।
  • प्रक्रिया: बाल पीड़ितों का बयान दर्ज करने की विधि और चिकित्सीय परीक्षण (Medical Examination) की प्रक्रिया को बारीकी से समझाया गया।

पहचान छिपाना और व्यवहार सुधारना प्राथमिकता

​प्रशिक्षण में अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई कि बाल अपराधों में पीड़िता या पीड़ित की पहचान किसी भी हाल में उजागर नहीं होनी चाहिए। यह कानूनी अपराध है।

  • संवेदनशीलता: पुलिस को निर्देश दिया गया कि बच्चों के साथ थाने में डरावना नहीं, बल्कि मानवीय और संवेदनशील व्यवहार किया जाए।
  • समय सीमा: जांच अधिकारियों को अनुसंधान (Investigation) निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सके।

ग्राम कचहरी से जुड़ेगा पुलिस का तालमेल

​सिर्फ बच्चों के अधिकार ही नहीं, इस कार्यशाला में ग्राम कचहरी की शक्तियों और कार्यों पर भी मंथन हुआ। पुलिस पदाधिकारियों को ग्राम कचहरी के विधिक प्रावधानों की जानकारी दी गई ताकि स्थानीय स्तर पर पुलिस और ग्राम कचहरी के बीच समन्वय सुदृढ़ हो सके और छोटे-मोटे विवाद गांव में ही सुलझ सकें।

​भागलपुर पुलिस का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से विधिक जागरूकता बढ़ेगी और पुलिसिंग अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण बनेगी।

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