- अलौकिक परंपरा: साल में एक बार नीचे आते हैं शिखर के पंचशूल; डीसी-एसपी की निगरानी में उतारा गया, हर कोई छूने को था बेताब
- शिव-शक्ति का मिलन: दोनों पंचशूलों को आपस में कराया गया स्पर्श; दुनिया में सिर्फ देवघर में निभाई जाती है यह अनूठी रस्म
- शनिवार को पुनर्स्थापना: आज साफ-सफाई और विशेष पूजा के बाद फिर शिखर पर सजेंगे पंचशूल; इसके बाद ही शुरू होगा गठबंधन
द वॉयस ऑफ बिहार (देवघर/संथाल परगना)
महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) के महापर्व को लेकर बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर पूरी तरह शिवमय हो चुकी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और पौराणिक परंपरा का निर्वहन किया गया। बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के मंदिर शिखरों पर विराजमान पवित्र पंचशूलों (Panchshul) को विधिवत नीचे उतारा गया। इस दुर्लभ क्षण का गवाह बनने और पंचशूल को स्पर्श करने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
शिव और शक्ति का प्रतीकात्मक मिलन
देवघर का बैद्यनाथ धाम दुनिया का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजते हैं।
- परंपरा: उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि महाशिवरात्रि से ठीक दो दिन पहले (द्वादशी तिथि को) इन पंचशूलों को उतारा जाता है।
- अद्भुत दृश्य: उतारने के बाद शिव और शक्ति (माता पार्वती) के प्रतीकों यानी दोनों पंचशूलों को आपस में स्पर्श कराया जाता है और साथ रखा जाता है। यह दृश्य अत्यंत अलौकिक होता है।
- गठबंधन पर रोक: चूंकि पंचशूल नीचे उतरे होते हैं, इसलिए इस एक दिन भक्त बाबा और मैैया का गठबंधन (Gathbandhan) नहीं कर पाते हैं।
आज (शनिवार) होगी पुनर्स्थापना
मंदिर प्रांगण के अन्य 20 मंदिरों के पंचशूल पहले ही उतारे जा चुके हैं।
- त्रयोदशी (शनिवार): आज सभी 22 मंदिरों के पंचशूलों की विशेष साफ-सफाई की जाएगी। इसके बाद प्रशासनिक भवन में सरदार पंडा द्वारा तांत्रिक विधि से सामूहिक पूजा की जाएगी। पूजा संपन्न होने के बाद आज ही सभी पंचशूलों को वापस शिखरों पर स्थापित कर दिया जाएगा।
- गठबंधन शुरू: पुनर्स्थापना के बाद मंदिर का पहला गठबंधन होगा, जिसके बाद आम श्रद्धालु भी गठबंधन चढ़ा सकेंगे।
प्रशासन मुस्तैद
इस अवसर पर डीसी नमन प्रियेश लकड़ा, एसपी सौरभ, डीडीसी पीयूष सिन्हा और एसडीओ रवि कुमार समेत तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने शिव बारात रूट और शिवगंगा समेत पूरे इलाके में सुरक्षा और साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए हैं।


