
- पटना में दो दिवसीय मंथन: योजना एवं विकास विभाग और एंथ्रोपोस इंडिया फाउंडेशन की पहल; शोध और मूल्यांकन तकनीक पर अधिकारियों को दी जा रही ट्रेनिंग
- डेटा बोलेगा सच: अपर मुख्य सचिव ने कहा- बिना सही आंकड़ों के विकास अधूरा; ‘एविडेंस बेस्ड पॉलिसी’ से ही बदलेगी बिहार की तस्वीर
- दिल की बात: डॉ. विजयलक्ष्मी ने साझा किया अनुभव- ‘एंथ्रोपोलॉजी से मेरा पुराना नाता, जमीनी हकीकत समझना ही सफलता की कुंजी’
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार में सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास कार्यों में पारदर्शिता आए, इसके लिए योजना एवं विकास विभाग (Planning and Development Department) ने एक बड़ी पहल की है। पटना में शुक्रवार को “शोध पद्धति, निगरानी और मूल्यांकन तकनीक” (Research Methodology, Monitoring and Evaluation Techniques) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसका उद्घाटन विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने किया।
‘डेटा ही निर्णय का आधार’
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. विजयलक्ष्मी ने कहा कि आज के दौर में ‘डाटा-आधारित निर्णय’ (Data-driven Decision Making) ही प्रशासन की सफलता की नींव है।
- वैज्ञानिक सोच: उन्होंने जोर देकर कहा कि कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति का उपयोग जरूरी है। केवल अनुमान के आधार पर नीतियां नहीं बनाई जा सकतीं, बल्कि ‘साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण’ (Evidence-based Policy Making) ही योजनाओं को प्रभावी बना सकता है।
“सिविल सर्विस में न होती तो…”
अपने संबोधन में डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने एक व्यक्तिगत किस्सा साझा करते हुए कहा, “एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) से मेरा पढ़ाई के दिनों से गहरा नाता रहा है। यदि मैं आज सिविल सेवा में नहीं होती, तो आप सबके बीच एक एंथ्रोपोलॉजिस्ट के रूप में मौजूद होती।” उनका कहना था कि समाज और संस्कृति की गहरी समझ ही किसी भी विकास योजना की सफलता की असली कुंजी है।
वरिष्ठ अधिकारी ले रहे ट्रेनिंग
इस कार्यक्रम में विभाग के प्रधान सचिव मयंक वरवडे, सचिव कँवल तनुज, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) के निदेशक रंजीत कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
- क्या सीख रहे अधिकारी: विशेषज्ञों द्वारा अधिकारियों को सैंपलिंग तकनीक, सर्वे डिजाइन, डेटा क्वालिटी, इम्पैक्ट इवैल्यूएशन (Impact Evaluation) और लॉजिकल फ्रेमवर्क अप्रोच जैसी उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मकसद: योजनाओं में पारदर्शिता
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य से लेकर जिला स्तर तक के मॉनिटरिंग सिस्टम को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इससे अधिकारियों की रिपोर्ट लेखन और डेटा विश्लेषण क्षमता बढ़ेगी, जिससे योजनाओं की समयबद्ध समीक्षा संभव हो सकेगी।


