बिहार विधानसभा में जल संसाधन विभाग के विभागीय बजट पर चर्चा के बाद मंत्री ने कहा कि देश की आज़ादी के बाद और वर्ष 2005 से पहले जितनी सिंचाई क्षमता विकसित हुई थी, उतनी ही क्षमता राज्य सरकार ने पिछले 20 वर्षों में अकेले विकसित कर ली है। उन्होंने दावा किया कि सरकार सिंचाई और पेयजल दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से काम कर रही है।
सोन और दुर्गावती जलाशय से मिलेगा पेयजल
मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि गंगा नदी का पानी लिफ्ट कर राजगीर और बोधगया सहित कई क्षेत्रों में पेयजल के रूप में पहुंचाया जा चुका है। अब औरंगाबाद, डेहरी और सासाराम के लोगों को सोन नदी का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं कैमूर, मोहनिया और भभुआ के लोगों को दुर्गावती जलाशय से पेयजल मिलेगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में सिंचाई का लक्ष्य 53.53 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 38.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू हो चुकी है।
विपक्ष की आलोचना पर मंत्री का जवाब
अनुदान राशि में कटौती का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से रखा गया था। इस पर मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ सदस्य पहले विभाग की सराहना करते थे, लेकिन अब विपक्ष में होने के कारण मजबूरी में आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
इंद्रपुरी जलाशय और वाणसागर परियोजना का जिक्र
मंत्री ने बताया कि कदवन जलाशय के विस्तार में कई राज्यों की भागीदारी के कारण दिक्कतें आ रही थीं, इसलिए इंद्रपुरी जलाशय योजना को आगे बढ़ाया गया। वाणसागर परियोजना को लेकर वर्ष 1973 से बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच समझौता लंबित था, जिससे बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी मिलना था।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2000 से लंबित इस मामले पर 10 जुलाई 2025 को गृह मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें झारखंड को 2 मिलियन एकड़ फीट और बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट पानी देने पर सहमति बनी। झारखंड से एनओसी न मिलने के कारण तिलैया परियोजना छोड़कर ढाढर सिंचाई परियोजना पर काम करने का निर्णय लिया गया।
कोसी–मेची लिंक परियोजना से सीमांचल को राहत
कोसी–मेची लिंक परियोजना के तहत अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिलों में लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही कोसी नदी के बाढ़ के पानी को मेची नदी के माध्यम से महानंदा बेसिन में भेजा जाएगा, जिससे बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने सीमांचल के विधायकों से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने की अपील की।
नेपाल में डैम निर्माण पर अड़चन
मंत्री ने कहा कि बिहार में बाढ़ का मुख्य कारण नेपाल, झारखंड तथा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दक्षिण–पश्चिम हिस्सों में होने वाली बारिश है। सरकार नेपाल में डैम बनाना चाहती है, लेकिन वहां से अनुमति नहीं मिल पा रही है और राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ी बाधा है।
7127.35 करोड़ रुपये का बजट ध्वनिमत से पारित
वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए जल संसाधन विभाग की 7127 करोड़ 35 लाख एक हजार रुपये की अनुदान मांग पर सदन में चर्चा हुई और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव को भी ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।


