- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डीएसी की मुहर; वायुसेना को मिलेंगे 114 नए राफेल, साथ में घातक कॉम्बैट मिसाइलें भी
- ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: फ्रांस से नहीं आएंगे बने-बनाए विमान, टाटा संस के साथ मिलकर देश में ही होगा निर्माण
- हवा में मचेगी गर्जना: कुल 176 राफेल विमानों के साथ भारतीय वायुसेना बनेगी और भी घातक
द वॉयस ऑफ बिहार (नई दिल्ली/पटना)
भारतीय वायुसेना की ताकत में अब ऐतिहासिक इजाफा होने जा रहा है। दुश्मनों के होश उड़ाने वाले ‘राफेल’ (Rafale) लड़ाकू विमानों का बेड़ा अब और विशाल होगा। भारत सरकार ने देश की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है, जिसकी कीमत 3.60 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमानों की खरीद पर मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही कॉम्बैट मिसाइलों और अन्य सैन्य साजो-सामान की खरीद को भी स्वीकृति मिली है।
देश में ही बनेंगे ‘बाहुबली’ विमान
इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पर केंद्रित होगा।
- स्वदेशी तकनीक: फ्रांस से खरीदे जाने वाले इन 114 राफेल विमानों में से ज्यादातर का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इन विमानों में भारत की अपनी युद्धक तकनीक (Indian Combat Technology) का इस्तेमाल होगा।
- टाटा-दसाल्ट की जोड़ी: फ्रांस की कंपनी दसाल्ट एविएशन (Dassault Aviation) ने कुछ समय पहले ही भारत की टाटा संस (Tata Sons) के साथ राफेल विमान के कुछ हिस्सों के निर्माण को लेकर समझौता किया था, जो इस डील में अहम भूमिका निभाएगा।
भारत के पास होंगे कुल 176 राफेल
इस नए सौदे के बाद भारतीय वायुसेना और नौसेना की संयुक्त ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ ऐसी होगी:
- पहले से मौजूद: 36 राफेल विमान वायुसेना पहले ही खरीद चुकी है।
- नौसेना के लिए: 26 राफेल (मरीन) विमानों का करार पहले ही हो चुका है।
- नई मंजूरी: अब 114 और राफेल विमानों की मंजूरी मिल गई है।
इस प्रकार, अगले कुछ सालों में भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमानों का एक विशाल और अजेय बेड़ा होगा।


