भागलपुर में भारत बंद: बैंकों में लटका ताला, कर्मचारियों का हल्ला बोल; 4 नए लेबर कोड के विरोध में कामकाज पूरी तरह ठप

  • 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का शक्ति प्रदर्शन; भागलपुर में बैंकिंग सेवाएं रहीं बाधित
  • INTUC, CITU समेत तमाम संगठनों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ भरी हुंकार
  • कर्मचारियों का आरोप- ‘नए लेबर कोड से खतरे में है नौकरी, नियोक्ताओं को मिली मनमानी छूट’

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)

​केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए ‘भारत बंद’ (Bharat Bandh) का व्यापक असर भागलपुर में भी देखने को मिला। बुधवार को सिल्क सिटी की रफ्तार थोड़ी थमी नजर आई, लेकिन सबसे बड़ा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा। शहर के विभिन्न इलाकों में राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे और कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

10 ट्रेड यूनियनों ने दिखाई ताकत

​इस बंद का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने किया था, जिसे किसान संगठनों का भी समर्थन प्राप्त था।

  • ​भागलपुर में बैंक कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं के बाहर जमा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
  • ​इस आंदोलन में इंटक (INTUC), एआईटीयूसी (AITUC), एचएमएस (HMS), सीआईटीयू (CITU), एआईसीसीटीयू (AICCTU), और सेवा (SEWA) जैसी प्रमुख यूनियनें एक झंडे के नीचे नजर आईं।

‘हायर एंड फायर’ नीति का विरोध

​प्रदर्शनकारी बैंक कर्मचारियों का गुस्सा मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 4 नए श्रम कोड (Labor Codes) को लेकर था।

  • ​यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार ने 29 पुराने और मजबूत श्रम कानूनों को खत्म करके ये 4 नए कोड थोपे हैं।
  • आरोप: इन नए नियमों से कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हो गए हैं। इससे नौकरी की सुरक्षा (Job Security) घट गई है और नियोक्ताओं (Employers) को कर्मचारियों को आसानी से नियुक्त करने या नौकरी से निकालने (Hire and Fire) की खुली छूट मिल गई है।

उपभोक्ता हुए परेशान, लेनदेन ठप

​बैंक बंद रहने के कारण भागलपुर के आम नागरिकों और व्यापारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नकद जमा-निकासी, चेक क्लीयरेंस और अन्य जरूरी बैंकिंग कार्य पूरी तरह बाधित रहे। कई लोग बैंकों के चक्कर काटकर मायूस लौटते देखे गए।

‘मांगें नहीं मानी तो तेज होगा आंदोलन’

​प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि श्रमिक विरोधी लेबर कोड को तुरंत वापस लिया जाए और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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