- कोईलवर थाने के मालखाने में बंद थीं बक्सर के रामजानकी मठ की बेशकीमती मूर्तियां; कोर्ट के आदेश पर हुईं रिहा
- सरपंच ने भरा 6 लाख का बेल बॉन्ड, विधिवत पूजा-पाठ के बाद ‘राम दरबार’ को बक्सर ले गए भक्त
- 2023 में हुई थी चोरी, अगले ही दिन पुलिस ने कर लिया था बरामद; 2011 में इसी मठ के पुजारी की हो चुकी है हत्या
द वॉयस ऑफ बिहार (आरा/कोईलवर)
भोजपुर जिले के कोईलवर थाने में मंगलवार को एक भावुक और आस्था से भरा नजारा देखने को मिला। पिछले तीन सालों से थाने के मालखाने (Malkhana) में बंद भगवान राम के दरबार की ऐतिहासिक अष्टधातु की मूर्तियां आखिरकार ‘मुक्त’ हो गईं। करीब 60 करोड़ रुपये मूल्य की इन मूर्तियों को सीजेएम (CJM) न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मठ समिति को सौंप दिया। जैसे ही भगवान की मूर्तियां बाहर आईं, वहां मौजूद भक्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
6 लाख का बॉन्ड भरकर ले गए भगवान को
ये मूर्तियां बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र के बड़का ढकाईच स्थित रामजानकी मठ की हैं।
- मंगलवार को सीजीएम न्यायालय में 6 लाख रुपये का बेल बॉन्ड (Bail Bond) भरने के बाद रिहाई का आदेश मिला। यह बॉन्ड बड़का ढकाईच की सरपंच बिंदु देवी और कुसुम देवी ने भरा।
- इसके बाद मठ के सचिव कन्हैया दुबे, सुधीर दुबे, रौशन पांडेय और अधिवक्ता धनेश पांडेय कोईलवर थाना पहुंचे।
- थानाध्यक्ष नरोत्तम चंद्र और अपर थानाध्यक्ष सुभाष कुमार मंडल की मौजूदगी में कागजी प्रक्रिया पूरी की गई।
- मूर्तियों की थाने में ही विधिवत पूजा-पाठ की गई और फिर जयकारों के साथ उन्हें वापस बक्सर (कृष्णब्रह्म) के लिए रवाना किया गया।
300 साल पुराना इतिहास और नेपाल कनेक्शन
रामजानकी मठ के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि इन मूर्तियों का ऐतिहासिक महत्व बहुत ज्यादा है।
- कीमत: बरामद अष्टधातु की 7 मूर्तियों और मुकुट की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
- इतिहास: इन मूर्तियों की स्थापना करीब 300 साल पहले नेपाल के महाराजा ने इस मठ में करवाई थी।
2023 में चोरी, 24 घंटे में रिकवरी
मालूम हो कि 21 जनवरी 2023 को बक्सर के बड़का ढकाईच मठ से राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और लड्डू गोपाल समेत 7 मूर्तियां और मुकुट चोरी हो गए थे।
- चोरी के अगले ही दिन, 22 जनवरी 2023 की अहले सुबह कोईलवर पुलिस ने आरा-छपरा मोड़ पर एक कार से सभी मूर्तियों को बरामद कर लिया था और एक चोर को हथियार के साथ गिरफ्तार किया था। तब से ये मूर्तियां कानूनी प्रक्रिया के तहत मालखाने में जमा थीं।
मठ का रहा है रक्तरंजित इतिहास
इस मठ पर चोरों की नजर हमेशा से रही है।
- इससे पहले 6 जून 2011 को भी यहां चोरी हुई थी। उस दौरान विरोध करने पर चोरों ने मठ के पुजारी भुनेश्वर दास की हत्या कर दी थी और 3 मूर्तियां ले भागे थे।
- उस वक्त भी 2013 में कोईलवर थाना क्षेत्र से ही उन मूर्तियों को बरामद किया गया था। संयोग देखिए, इस बार भी कोईलवर पुलिस ने ही भगवान को वापस ढूंढा और सुरक्षित रखा।


