- अधिकारियों की टीम ने लेबर रूम, इमरजेंसी से लेकर दवा स्टोर और जीविका रसोई तक की जांच
- मरीजों से सीधा संवाद कर जानी जमीनी हकीकत; पिरामल फाउंडेशन की टीम भी रही साथ
- जांच के बाद मीडिया ने पूछा सवाल तो कन्नी काट गए अधिकारी, कुछ भी बोलने से किया इनकार
द वॉयस ऑफ बिहार (शेखपुरा)
अक्सर कुव्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में रहने वाले शेखपुरा सदर अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम ने देर शाम अचानक धावा बोल दिया। एडीएम, एसडीएम और मुख्यालय डीएसपी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लेने के लिए औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया।
डेढ़ घंटे तक चली मैराथन जांच
अधिकारियों की यह जांच-पड़ताल करीब डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान टीम ने अस्पताल के हर महत्वपूर्ण विभाग का बारीकी से मुआयना किया।
- किन जगहों की हुई जांच: अधिकारियों ने लेबर रूम, इमरजेंसी वार्ड, एक्सरे कक्ष, दवा का स्टोर रूम और मरीजों के भोजन के लिए संचालित जीविका रसोई का जायजा लिया।
- मरीजों से पूछताछ: केवल फाइलों और कमरों तक ही जांच सीमित नहीं रही, बल्कि अधिकारियों ने वहां भर्ती मरीजों से सीधे बात कर अस्पताल की व्यवस्था और मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी भी ली।
ये अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण टीम में जिले के कई वरीय पदाधिकारी शामिल थे:
- संजय सिंह (एडीएम सह विभागीय जांच पदाधिकारी)
- प्रियंका कुमारी (एसडीएम)
- धीरज कुमार (मुख्यालय डीएसपी)
- पिरामल फाउंडेशन के कई कर्मी भी जांच में सहयोग करते नजर आए।
मीडिया के सवालों पर साधी चुप्पी
इस पूरे निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच खत्म होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने अधिकारियों से निरीक्षण का निष्कर्ष जानना चाहा, तो वे सवालों से बचते नजर आए।
- अधिकारियों ने मीडिया को बयान देने से साफ इनकार कर दिया और बिना कुछ बोले वहां से निकल गए।
- सवालों के घेरे में चुप्पी: गौरतलब है कि सदर अस्पताल में कुव्यवस्था की खबरें अक्सर अखबारों और टीवी चैनलों की हेडलाइन बनती रहती हैं। ऐसे में अधिकारियों का यह औचक निरीक्षण और फिर मीडिया के सवालों पर चुप्पी साधना कई तरह के इशारे कर रहा है। लोग कयास लगा रहे हैं कि अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है।


