शेखपुरा में थमी शहर की रफ्तार: 50 रुपये ‘बैरियर शुल्क’ और हाईवे पर रोक के खिलाफ 4000 ई-रिक्शा चालकों की हड़ताल; यात्री हुए बेहाल

  • स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर के पास चालकों का उग्र प्रदर्शन; अचानक हुई हड़ताल से चरमराई यातायात व्यवस्था
  • यूनियन जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव का सवाल- ‘जब हाईवे पर चलने ही नहीं देंगे, तो ई-रिक्शा शहर में प्रवेश कैसे करेंगे?’
  • 50 रुपये के शुल्क को चालकों ने बताया बड़ा आर्थिक बोझ; पैदल चलने या महंगे वाहन लेने को मजबूर हुए आम लोग

द वॉयस ऑफ बिहार (शेखपुरा)

​शेखपुरा शहर में गुरुवार (12 फरवरी) को यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले ई-रिक्शा के पहिए अचानक थम गए। हाईवे पर ई-रिक्शा के परिचालन पर रोक लगाने और बैरियर शुल्क (Barrier Fee) बढ़ाए जाने के विरोध में शहर के करीब 4,000 से अधिक ई-रिक्शा चालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी है। चालकों ने स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर के समीप बड़ी संख्या में एकत्रित होकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

क्यों भड़के हैं ई-रिक्शा चालक?

​हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ई-रिक्शा यूनियन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने प्रशासन के इस कदम को चालकों के साथ अन्याय बताया है।

    • अतिरिक्त आर्थिक बोझ: उन्होंने बताया कि शेखपुरा में ई-रिक्शा चालकों से 50 रुपये बैरियर शुल्क वसूला जा रहा है, जो आसपास के अन्य जिलों की तुलना में बहुत अधिक है। यह गरीब चालकों की कमर तोड़ रहा है।
    • हाईवे पर नो-एंट्री: इसके अलावा हाईवे पर ई-रिक्शा के चलने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है।

यूनियन का सीधा सवाल:

“अगर प्रशासन हमें हाईवे पर चलने की अनुमति ही नहीं देगा, तो ई-रिक्शा शहर के अंदर प्रवेश कैसे करेंगे? हमारी आमदनी पहले ही कम है, ऊपर से यह फरमान हमारे परिवारों को भुखमरी के कगार पर ला देगा।”

 

आम यात्रियों की बढ़ी फजीहत

​अचानक हुई इस हड़ताल का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता और यात्रियों को भुगतना पड़ा।

      • ​सुबह से ही शहर में एक भी ई-रिक्शा नहीं चलने से स्कूल जाने वाले बच्चों, ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
      • ​लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर दिखे।
      • ​जिन्हें ज्यादा जल्दी थी, उन्हें मजबूरी में अपनी जेब ढीली कर महंगे निजी वाहनों (Private Vehicles) का सहारा लेना पड़ा।

​यूनियन ने प्रशासन से साफ मांग की है कि जब तक बैरियर शुल्क में राहत नहीं दी जाती और हाईवे पर परिचालन की अनुमति नहीं मिलती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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