
बिहार विधान परिषद में गुरुवार को सूखे नशे (ड्रग्स/नशीले पदार्थ) का मुद्दा जोर-शोर से उठा। पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने इसे गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
सीमा क्षेत्रों में बढ़ रही प्रवृत्ति
विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र नारायण यादव ने सदन में कहा कि उनका घर घाघरा नदी के किनारे है और शराबबंदी लागू होने के बाद सीमावर्ती इलाकों में सूखे नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा पर यूपी सरकार द्वारा बड़ी संख्या में शराब की दुकानें खोली जा रही हैं, जिससे अवैध आवागमन बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, प्रतापपुर चीनी मिल के आसपास पहले एक दुकान थी, जो अब बढ़कर करीब 50 हो गई है और वहां से शराब की आवाजाही जारी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार से सटे राज्यों की सरकारों से समन्वय और संवाद बढ़ाया जाना चाहिए ताकि इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
बच्चों पर पड़ रहा बुरा असर
जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर ने भी सदस्य की चिंता को जायज बताते हुए कहा कि सूखे नशे की चपेट में स्कूली बच्चे तक आ रहे हैं, जिससे उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। उन्होंने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि बच्चों को नशे से बचाने के लिए मिशन मोड में काम करने की जरूरत है। इस दौरान कई अन्य सदस्यों ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
सरकार का जवाब और आंकड़े
सरकार की ओर से मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह मौजूदा समय का गंभीर सवाल है और सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने सदन को बताया कि सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है:
- उत्तर प्रदेश सीमा पर 23 चेकपोस्ट
- पश्चिम बंगाल सीमा पर 8 चेकपोस्ट
- झारखंड सीमा पर 19 चेकपोस्ट
- नेपाल सीमा पर 17 चेकपोस्ट कार्यरत हैं
सभी चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे और ब्रेथ एनालाइजर उपलब्ध कराए गए हैं। नेपाल सीमा पर एसएसबी के साथ संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि अब तक करीब 10 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, करोड़ों रुपये की शराब जब्त की गई है, 16 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई है और एक लाख से अधिक वाहन जब्त किए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ड्रग्स के खिलाफ और सघन अभियान चलाया जाएगा।
कुल मिलाकर सदन में इस मुद्दे पर व्यापक सहमति दिखी कि सूखे नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कड़े और समन्वित कदम जरूरी हैं।


