बिहार में 1 अप्रैल से महंगी हो सकती है बिजली, 35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी का प्रस्ताव

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ महंगाई का झटका लग सकता है। राज्य की दोनों बिजली वितरण कंपनियों—साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड—ने बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव बिहार विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। अगर आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो 1 अप्रैल 2026 से बिजली बिल महंगा हो सकता है।

3200 करोड़ रुपये बकाये का हवाला

बिजली कंपनियों ने करीब 3200 करोड़ रुपये के पुराने बकाये की वसूली को दर बढ़ाने का मुख्य आधार बताया है। कंपनियों का कहना है कि इस राशि की वसूली के लिए विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण से भी फैसला उनके पक्ष में आया है। ऐसे में घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं—सभी श्रेणियों के बिल में इजाफा संभव माना जा रहा है।

कंपनियों की आर्थिक दलील

वितरण कंपनियों के अनुसार, वर्ष 2012 में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के विभाजन के बाद बनी नई कंपनियों के पुराने खर्च और देनदारियों की भरपाई राज्य सरकार को करनी थी, लेकिन अब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं हो सका है। इसके चलते बिजली खरीद, रखरखाव और संचालन पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

11 साल बाद फिर उठा मुद्दा

कंपनियों ने आयोग को बताया है कि 2015 में भी इसी बकाये को टैरिफ में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उस समय खारिज कर दिया गया था। अब करीब 11 साल बाद इस मुद्दे को फिर से नए सिरे से उठाया गया है। कंपनियों का तर्क है कि यदि समाधान नहीं निकला तो बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव

बिजली कंपनियों ने आयोग के सामने 35 पैसे प्रति यूनिट दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि कोयले की कीमतों में वृद्धि, परिवहन खर्च और रखरखाव लागत बढ़ने से उत्पादन व खरीद की लागत लगातार ऊपर जा रही है, जिससे वित्तीय संतुलन बिगड़ रहा है।

आयोग ने शुरू की समीक्षा

बिहार विद्युत नियामक आयोग ने प्रस्ताव पर विचार प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग का कहना है कि दर निर्धारण में वास्तविक खर्च, राजस्व स्थिति और उपभोक्ता हित तीनों को ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल राज्य सरकार की सब्सिडी के कारण उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम दरों पर बिजली मिल रही है, लेकिन यदि सब्सिडी में बढ़ोतरी नहीं होती है तो दर वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल टैरिफ बढ़ाना स्थायी समाधान नहीं है। सरकार और बिजली कंपनियों को मिलकर ऐसी नीति बनानी होगी जिससे घाटा भी कम हो और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।

फिलहाल अंतिम फैसला आयोग के पास लंबित है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू हो सकती हैं। ऐसे में राज्य के लाखों उपभोक्ताओं की नजरें अब आयोग के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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