हाजीपुर के सदर अस्पताल में देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह अचानक औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गईं। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर से दो संदिग्ध दलालों को गिरफ्तार किया गया, वहीं परिसर के बाहर खड़ी सात एम्बुलेंस को जब्त कर लिया गया। यह कार्रवाई हाल ही में सामने आए नवजात शिशु अदला-बदली प्रकरण के बाद की गई है।
मोबाइल में मिले निजी अस्पतालों के सबूत
निरीक्षण के दौरान डीएम ने अस्पताल परिसर में सक्रिय संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करवाई। तलाशी में उनके मोबाइल फोन से निजी अस्पतालों की तस्वीरें और पैसों के लेन-देन से जुड़े कई सबूत मिले। दोनों के खिलाफ नगर थाना में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दलालों पर सख्ती, पहचान पत्र अनिवार्य
जिलाधिकारी ने अस्पताल परिसर के बाहर एम्बुलेंस पार्किंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। साथ ही सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और एम्बुलेंस चालकों को आईडी कार्ड लगाकर ड्यूटी करने का सख्त आदेश दिया गया है। मरीजों के परिजनों के लिए भी पहचान पत्र अनिवार्य करने की तैयारी की जा रही है ताकि दलालों की पहचान आसानी से हो सके।
अनुपस्थित मिले अधिकारी
निरीक्षण के समय अस्पताल अधीक्षक गुड़िया कुमारी और अस्पताल प्रबंधक मंजर आलम ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जवाब-तलब की कार्रवाई शुरू की है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नवजात प्रकरण के बाद बढ़ी सख्ती
कुछ दिन पहले सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु अदला-बदली और गलत जानकारी देकर ऑपरेशन कराने का आरोप सामने आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम के निर्देश पर तीन-स्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सात कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी शामिल हैं।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी क्लीनिक ले जाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश हैं और आगे भी अभियान जारी रहेगा।


