- किताबों में अंग प्रदेश का इतिहास पढ़कर खिंची चली आईं विदेशी पर्यटक, 8वीं सदी के महाविहार को देख हुईं अभिभूत
- कोलकाता से ट्रेन से पहुंचीं भागलपुर; बरारी घाट पर शाम की गंगा आरती में मिली अद्भुत शांति
- मारी श्रॉफर छठी बार आई हैं भारत, गुरुवार को राजगीर के लिए होंगी रवाना
द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)
बिहार के ऐतिहासिक अंग क्षेत्र यानी भागलपुर की ख्याति अब सात समंदर पार भी पहुंच रही है। इसी कड़ी में स्विट्जरलैंड (Switzerland) की दो सैलानी, मारी श्रॉफर और उनकी दोस्त एन, बुधवार को भागलपुर पहुंचीं। किताबों में भागलपुर के गौरवशाली इतिहास और यहां की धार्मिक महत्ता के बारे में पढ़कर वे इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने खुद यहां आकर इन स्थलों को देखने का फैसला किया।
विक्रमशिला महाविहार देख हुईं मंत्रमुग्ध
कोलकाता से ट्रेन के जरिए भागलपुर पहुंचीं इन दोनों विदेशी पर्यटकों ने अपने भ्रमण की शुरुआत ऐतिहासिक विक्रमशिला महाविहार से की।
- 8वीं सदी में बने इस विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय के अवशेषों और यहां की वास्तुकला को देखकर वे काफी खुश और चकित नजर आईं।
- उन्होंने गाइड और स्थानीय लोगों से इस महाविहार के इतिहास के बारे में और अधिक जानकारी ली।
बाबा बूढ़ानाथ के दरबार में लगाई हाजिरी
विक्रमशिला भ्रमण के बाद दोनों पर्यटक अपने सहयोगी और राजस्थान निवासी के.डी. सिंह के साथ शहर के प्रसिद्ध बाबा बूढ़ानाथ मंदिर पहुंचीं।
- यहां उन्होंने भारतीय परंपरा के अनुसार भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की।
- मंदिर की शांति और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें काफी प्रभावित किया।
गंगा आरती में मिली रूहानी शांति
शाम के समय दोनों विदेशी मेहमान बरारी घाट पर आयोजित होने वाली भव्य गंगा आरती में शामिल हुईं।
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- आरती के दौरान दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने बताया कि यहां आकर उन्हें मन को एक अलग ही तरह की शांति (Inner Peace) मिली है।
- मारी श्रॉफर ने बताया कि उन्हें भारत की संस्कृति से बेहद लगाव है और वह अब तक छह बार भारत का भ्रमण कर चुकी हैं, लेकिन भागलपुर का यह अनुभव उनके लिए खास रहा।
अगला पड़ाव राजगीर:
भागलपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के बाद दोनों पर्यटक गुरुवार को बिहार के एक और प्रमुख पर्यटन स्थल राजगीर के लिए रवाना हो जाएंगी।


